इमरान बोले शायद न पड़े राहत पैकेज लेने की जरुरत , बताई यह वजह

इमरान बोले शायद न पड़े राहत पैकेज लेने की जरुरत , बताई यह वजह

इमरान खान का कहना है कि शायद अब पाकिस्तान को राहत पैकेज लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी क्योंकि असके मित्र देशों ने उनसे मदद देने का वादा किया हैं।

Jantantra Tv Desk

October 19,2018 05:32

नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का कहना है कि शायद अब पाकिस्तान को राहत पैकेज लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी क्योंकि असके मित्र देशों ने उनसे मदद देने का वादा किया हैं। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान ने IMF से  राहत पैकेज देने की मांग की थी। ताकि देश की आर्थिक स्थिति कुछ बेहतर हो सके । 

बुधवार को वरिष्ठ संपादकों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में खान ने कहा कि उनकी सरकार पाकिस्तान के ‘कुछ मित्र देशों’ साथ संपर्क में है। सरकार ने उनसे भुगतान संतुलन में घाटे और घटते विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर सहयोग की मांग की है। हालांकि इमरान ने किसी देश का नाम नहीं बताया। पाकिस्तानी मीडिया में छपी रिपोर्टों के अनुसार सरकार वित्तीय मदद के लिए चीन और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ संपर्क में है. ‘द न्यूज़’ ने खान के हवाले से खबर दी है, ‘‘उनका (मित्र देशों) रुख सकारात्मक है. मुझे उम्मीद है कि हमें हमारी आर्थिक जरूरतों के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से संपर्क नहीं करना होगा.’’ 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का यह बयान ऐसे समय आया है जब आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड और अमेरिका ने पाकिस्तान को दिए जाने वाले राहत पैकेज पर कुछ कड़ी टिप्पणियां की हैं। इसमें पाकिस्तान पर उसके कुल कर्ज की जानकारी देने और पारदर्शिता पूरी करने के लिए कहा था।

इसमें चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए चीन से लिए गए कुल कर्ज का ब्योरा भी मांगा गया है. खान ने देश की आर्थिक हालत सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें लक्जरी कारों की बिक्री, मितव्ययता शामिल है।

आपको बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ बेलआउट (राहत) के सौदे में कर्जों की पूरी पारदर्शिता दिखानी होगी, जिनमें से अधिकांश कर्ज चीन से उसकी ऐतिहासिक बेल्ट और रोड (बीआरआई और पाक में सीपेक) योजना के तहत मिला है. इंडोनेशिया के बाली शहर में आयोजित आईएमएफ और विश्व बैंक समूह की सालाना बैठक में लेगार्ड ने कहा था, "हम जो भी काम करते हैं, उसमें किसी देश के कर्ज के स्वरूप और आकार को लेकर हमारे पास पूरी स्पष्टता और पारदर्शिता होनी जाहिए."

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