दीवाली में क्यों घरो के बाहर बनाई जाती हैं रंगोली, इसका महत्व और इतिहास

दीवाली में क्यों घरो के बाहर बनाई जाती हैं रंगोली, इसका महत्व और इतिहास

दीवाली के मौके पर घरों के बाहर रंगोली बनाने का रिवाज है ऐसा माना जाता है कि रंगोली बनाना घर के लिए शुभ माना जाता है

Jantantra Tv Desk

November 6,2018 03:25

दिवाली के त्यौहार पर हर कोई अपने घरों को अच्छे से सजाता है, घर के हर कोने पर दिए जलाए जाते हैं। दीवाली पर घरों में साफ-सफाई के साथ घर को सजाने का भी विधान है। घर को पेंट कराया जाता है, झालर लगाई जाती हैं, घर के बाहर रंगोली बनानई जाती हैं। बात दें कि दीपावली पर घर में रंगोली मनाना काफी शुभ माना जाता है।

क्या है रंगोली का इतिहास

रंगोली भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और लोक-कला है।अलग अलग प्रदेशों में रंगोली के नाम और उसकी शैली में भिन्नता हो सकती है लेकिन इसके पीछे निहित भावना और संस्कृति में पर्याप्त समानता है। इसकी यही विशेषता इसे विविधता देती है और इसके विभिन्न आयामों को भी प्रदर्शित करती है। इसे सामान्यतः त्यौहार, व्रत, पूजा, उत्सव विवाह आदि शुभ अवसरों पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है।

विभिन्न अवसरों पर बनाई जाने वाली इन पारंपरिक कलाकृतियों के विषय अवसर के अनुकूल अलग-अलग होते हैं। इसके लिए प्रयोग में लाए जाने वाले पारंपरिक रंगों में पिसा हुआ सूखा या गीला चावल, सिंदूर, रोली,हल्दी, सूखा आटा और अन्य प्राकृतिक रंगो का प्रयोग किया जाता है परन्तु अब रंगोली में रासायनिक रंगों का प्रयोग भी होने लगा है। रंगोली को द्वार की देहरी, आँगन के केंद्र और उत्सव के लिए निश्चित स्थान के बीच में या चारों ओर बनाया जाता है। कभी-कभी इसे फूलों, लकड़ी या किसी अन्य वस्तु के बुरादे या चावल आदि अन्न से भी बनाया जाता है।

रंगोली बनाने का उद्देश्य

रंगोली धार्मिक, सांस्कृतिक आस्थाओं की प्रतीक रही है। इसको आध्यात्मिक प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण अंग माना गया है। गावों में भी घर-आँगन बुहारकर लीपने के बाद रंगोली बनाने का रिवाज आज भी विद्यमान है। अल्पना जीवन दर्शन की प्रतीक है जिसमें नश्वरता को जानते हुए भी पूरे जोश के साथ वर्तमान को सुमंगल के साथ जीने की कामना और श्रद्धा निरंतर रहती है।

रंगोली की डिजाइंस

 

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