दो वक्त की रोटी के लिए गेंदबाजी करते थे पापू, हर विकेट के मिलते थे 10 रुपये.....

दो वक्त की रोटी के लिए गेंदबाजी करते थे पापू, हर विकेट के मिलते थे 10 रुपये.....

पापू राय ने दो वक्त की रोटी के लिए अपने हाथों में गेंद थामी और वहीं गेंद तय करती थी उनकी दो वक्त की रोटी। 23 साल के पापू को हर विकेट के लिए 10 रुपये

Jantantra Tv Desk

October 20,2018 01:25

नई दिल्ली। लोग कहते हैं जो दर्द देता हैं वहीं दवा भी देता हैं और किसी का जूनून इस हद तक बढ़ जाता हैं की उसकी किस्मत को पलट देता हैं। एक ऐसी ही कहानी हैं क्रिकेटर पापू यादव की । जिन्हें देवधर ट्रॉफी के लिए अजिंक्य रहाणे की कप्तानी वाली भारत की सी टीम में शामिल किया गया हैं। पापू राय मूल रुप से कोलकाता के रहने वाले हैं । लेकिन इनकी कहानी बेहद ही दर्दनाक हैं। पापू राय ने दो वक्त की रोटी के लिए अपने हाथों में गेंद थामी और वहीं गेंद तय करती थी उनकी दो वक्त की रोटी। 23 साल के पापू को हर विकेट के लिए 10 रुपये मिलते थे और उन्हीं पैसों से वह अपना गुजारा करते थे। 

अपने नये राज्य ओडिशा की तरफ से विजय हजारे ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद देवधर ट्रॉफी के लिए उन्हें चूना गया और चयन होने पर वह अपने पुराने दिनों को याद करके पूरी रात रोते रहे। पापू राय ने जब 'मम्मी-पापा' कहना भी शुरू नहीं किया था तब उन्होंने अपने माता-पिता गंवा दिए थे। पापू के माता-पिता जमादार राय और पार्वती देवी बिहार के सारण जिले के रहने वाले थे। वे रोजगार की तलाश में बंगाल आ गए थे। पापू के पिता जमादार राय ट्रक ड्राइवर थे। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। मां पार्वती लंबी बीमारी के बाद चल बसी थीं। 

पापू ने बयां की अपनी कहानी

पापू ने अपने मुश्किल भरे दिनों को याद करते हुए एजेंसी से कहा, ‘भैया लोग बुलाते थे और बोलते थे कि बॉल डालेगा तो खाना खिलाऊंगा और हर विकेट का 10 रुपये देते थे.’पापू बताते है कि काश कि वे आज मुझे भारत सी की तरफ से खेलते हुए देखने के लिये जीवित होते। मैं कल पूरी रात नहीं सो पाया और रोता रहा। मुझे लगता है कि पिछले कई साल की मेरी कड़ी मेहनत का अब मुझे फल मिल रहा है। माता-पिता की मौत के बाद पापू के चाचा और चाची उनकी देखभाल करने लगे लेकिन जल्द ही उनके मजदूर चाचा भी चल बसे। इसके बाद इस 15 वर्षीय किशोर के लिये एक समय का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया। लेकिन क्रिकेट से उन्हें नया जीवन मिला। 

बतौर तेज गेंदबाज की थी शुरुआत

पापू राय ने अपने करियर का आगाज़ बतौर तेज गेंदबाज की थी। लेकिन हावड़ा क्रिकेट अकादमी के कोच सुजीत साहा ने उन्हें स्पिन गेंदबाजी करने की सलाह दी। वह 2011 में बंगाल क्रिकेट संघ की सेकेंड डिवीजन लीग में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। उन्होंने तब डलहौजी की तरफ से 50 विकेट लिए थे। 

खाने और घर की तलाश में पापू भुवनेश्वर से 100 किमी उत्तर पूर्व में स्थित जाजपुर आ गए। पापू ने कहा, ‘मेरे दोस्त (मुजाकिर अली खान और आसिफ इकबाल खान) जिनसे मैं यहां मिला, उन्होंने मुझसे कहा कि वे मुझे भोजन और छत मुहैया कराएंगे. इस तरह से ओडिशा मेरा घर बन गया.’

ऐसा रहा उनका करियर

पापू राय ने ओडिशा की तरफ से खेलते हुए लिस्ट ए के 8 मैचों में 14 विकेट अपने नाम किए। देवधर ट्रॉफी में अपनी फिरकी का जादू दिखाने के लिए अब पापू पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मुझे मौका मिलेगा और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा, इससे मुझे काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

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