सड़क के गड्ढे बने नवजात के लिए काल, बीच सड़क में ही हुआ जन्म फिर

सड़क के गड्ढे बने नवजात के लिए काल, बीच सड़क में ही हुआ जन्म फिर

उत्तर प्रदेश सरकार सड़कों को गढ्ढामुक्त कराने के भले ही लाख दावे कर रही हो लेकिन इसके लिए जिम्मेदारान अफसरों को सरकार के आदेशों को हवा में उड़ा रहे ह

Jantantra Tv Desk

November 24,2018 11:04

उत्तर प्रदेश सरकार सड़कों को गढ्ढामुक्त कराने के भले ही लाख दावे कर रही हो लेकिन इसके लिए जिम्मेदारान अफसरों को सरकार के आदेशों को किस कदर हवा में उड़ा रहे है इसकी बानगी एक बार फिर एटा में देखने को मिली। आलम ये है कि सड़कों में गढ्ढे नहीं बल्कि गढ्ढों में अब सड़के तब्दील हो चुकी है और ये गढ्ढे अब लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन चुके है। एटा शहर की ज्यादातर सड़के चलने लायक नहीं रह गयी है। गढ्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों के चलते बीते चौबीस घंटे में प्रसव पीड़ा से कराहती महिलाओं के दो नवजात बच्चों की जिंदगी इन गढ्ढों में समां गयी। गनीमत ये थी कि पहले मामले में जज्जा-बच्चा को तो बचा लिया गया लेकिन आज दूसरे नवजात बच्चे के लिए काल बन चुकी इन सड़कों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष देखा जा रहा है और लोग सरकार के साथ साथ इसके लिए जिम्मेदार अफसरों को कोस रहे है लेकिन अफसरों के कांनों में जूं तक नहीं रेंग रही है। चलिए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला।

गढ्ढों में तब्दील सड़कें प्रसव पीड़ा से कराहती महिलाओं के लिए अब काल बन चुकी है। यह घटना है थाना मलावन के सोहार की जहां पर युवक आर्यन अपनी सात माह की गर्भवती पत्नीगीता को लेकर एटा अन्ट्रासाउंड कराने रहा था। गीता और उसके पति ने कभी सपनेमें भी ये नहीं सोचा होगा कि अपने जिस नवजात शिशु के अच्छे स्वास्थ और चेकअप केलिए वो अन्ट्रासाउंड कराने जा रहे है शहर की बदहाल सड़के उसके नवजात शिशु कीमौत का सबब बन जाएंगी। शहर के बीचो बीच ठण्डी सड़क के समीप काली मंदिर के निकट गीता उस समय प्रसव पीड़ा से बुरी तरह कराह उठी जब उसके पति की बाईक गढ्ढे में तब्दील हो चुकी सड़क से गुजरी। आलम ये था कि गीता और उसका पति कुछ समझ पाते बीच सड़क पर ही सात माह की गर्भवती गीता को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी और उन्हें इतना भी समय नहीं मिला कि वो अस्पताल तक पहुंच सके।

सड़क से गुजर रही महिलाओं और राहगीरों ने चादर की आड़ करी और प्रसव पीड़ा से कराहती गीता को वहीं प्रसव हो गया लेकिन दुर्भाग्य ये कि उसके सात माह के नवजात शिशु की तबतक मौत हो चुकी थी और गीता की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। इसी दरमियान लोगों ने एम्बुलेंस को फोन किया और गीता को जिला महिला चिकिक्तसालय में भर्ती कराया जहॉं उसकी हालत नाजुक बनी हुयी है। अपने नवजात शिशु की मौत के गम में गीता पूरी तरह टूट चुकी है और पति अपनी बेबसी को कोस रहा है वहीं लोग महिला केनवजात शिशु की असामयिक मौत से गमजदा थे और अफसरों के साथ साथ जनप्रतिनिधियों को कोसते नजर आये। अब सवाल ये उठता है कि सरकार के आदेश के बाद भी वहां के अफसरों ने सरकार के सड़कों को गढ्ढामुक्त क्यों नहीं किया अगर सरकार के आदेशों का पालन सही से किया गया होता तो आज एक नवजात शिशु की मौत होती ।

 

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