शिवपाल यादव पर मेहरबान हुई योगी सरकार , आवंटित किया मायावती का बंगला

शिवपाल यादव पर मेहरबान हुई योगी सरकार , आवंटित किया मायावती का बंगला

राज्य संपत्ति विभाग ने शिवपाल सिंह यादव को जो नया बंगला आवंटित किया है, उसमें कभी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की चीफ मायावती का दफ्तर था।

Jantantra Tv Desk

October 12,2018 03:31

नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में पीछले दिनों बंगले को लेकर खुब विवाद हुआ था।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपना बंगला खाली करना पड़ गया था । लेकिन अब एकबार फिर से अब ये मुद्दा सुर्खियों में छाया हुआ हैं, इस बार सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के संयोजक शिवपाल सिंह यादव पर बड़ी मेहरबान नजर आ रही है। दरअसल राज्य संपत्ति विभाग ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को जो नया बंगला आवंटित किया है, उसमें कभी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की चीफ मायावती का दफ्तर था। 

योगी सरकार ने लखनऊ में बसपा सुप्रिमो मायावती के पूर्व कार्यालय 6 लाल बहादुर शास्त्री मार्ग के बंगला को शिवपाल सिंह यादव को आवंटित कर दिया है। समाजवादी पार्टी से बगावत कर समाजवादी सेकुलर मोर्चा का गठन करने वाले शिवपाल यादव पर योगी सरकार कुछ ज्यादा ही मेहरबान नजर आ रही है। राज्य संपत्ति विभाग ने शिवपाल यादव को नया बंगला आवंटित किया है वह कभी बसपा अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का आफिस हुआ करता था।शिवपाल पर प्रशासन की इस मेहरबानी से कई कयास लगाए जाने लगे हैं। बता दें कि शिवपाल को ये बंगला बतौर विधायक दिया गया है। 

अगस्त की शुरुआत में शिवपाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने दामाद को लेकर मुलाकात भी की थी। हालांकि मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि वो इटावा में बढ़ते अपराध को लेकर मुख्यमंत्री से मिले थे। 

सुप्रीम कोर्ट की पड़ी थी गाज

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपना बंगला खाली करने का आदेश दिया था।  कोर्ट ने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री एक आम नागरिक होता है इसलिए उसे सरकारी बंगले आवंटित करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। कोर्ट ने यूपी मिनिस्टर सैलरी अलाउंट ऐंड मिसलेनियस प्रॉविजन ऐक्ट के उन प्रावधानों को रद्द कर दिया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले में रहने का आधिकार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ऐक्ट का सेक्शन 4 (3) असंवैधानिक है। 

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