उत्तराखंड में कब शुरु होगी शीतकालीन यात्रा ?

उत्तराखंड में कब शुरु होगी शीतकालीन यात्रा ?

Jantantra Tv Desk

December 3,2018 05:10

उत्तराखंड में चारों धाम के कपाट बंद हुए कई दिन बीत गए हैं, और सभी धामों से देव विग्रह शीतकालीन गद्दियों में विराजमान भी हो चुके हैं, इन गद्दी स्थलों में भगवान के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोल भी दिए गये हैं, लेकिन देश के अधिकांश भाग में लोगों को ये जानकारी नहीं है कि शीतकालीन गद्दियों तक कैसे पहुंचा जाए, दरअसल उत्तराखंड में लंबे वक्त से शीतकालीन यात्रा शुरु करने की मांग की जा रही है, लेकिन अलग उत्तराखंड राज्य बनने के 18 साल बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है, असल में उत्तराखंड के चार धामों में 6 माह देव और 6 माह नर पूरा का विधान है, ऐसे में जब चारों धामों के कपाट बंद हो जाते हैं तो गंगाजी मुखबा में प्रवास करती हैं, जबकि यमुना जी खरसाली में विराजमान होती हैं, वहीं भगवान केदारनाथ ओंकारेश्वर में विराजते हैं, जबकि भगवान बदरीनाथ पांडूकेश्वर में दर्शन देते हैं।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक 6 माह की पूजा का विधान स्वयं भगवान शंकर ने दिया, कहते हैं केदार क्षेत्र में एकबार इंद्र ने कठोर तप किया, जिसकी तपस्या से शंकर प्रसन्न हुए, उन्होंने इंद्र को दर्शन दिये, तब इंद्र ने भगवान शंकर से अपना पूरा करने का वरदान मांगा और साथ ही भक्तों के कल्याण लिए केदार क्षेत्र में प्रवास करने की प्रार्थना की,  भगवान शंकर ने तथास्तु कहा, इसके बाद इन्द्र ने 6 माह तक वहां पूजा परंपरा निभाई, एक दिन शीतकाल में जब वो केदारक्षेत्र पहुंचे तो उनके लिए शंकर का दर्शन करना मुश्किल हो गया, तब इंद्र ने भगवान से कहा- प्रभू! जब शीतकाल के चलते केदार क्षेत्र में प्रवेश करना उनके लिए मुश्किल भरा हो गया है तो फिर आम जन के बूते की बात कहा है। कहते  हैं इसी के बाद 6 माह देव और 6 माह नर पूजा का विधान बनाया गया। यही वजह है कि 6 माह तक यात्रा चलने के बाद चारों धाम के कपाट बंद कर दिये जाते हैं, और देव विग्रहों को शीतकालीन प्रवास स्थलों पर ले जाया जाता है। जहां श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पुण्य प्राप्त करते हैं। लेकिन इन शीतकालीन प्रवास स्थलों में श्रद्धालुओं की भीड़ उस तरह से नजर नहीं आती है, जैसी की चारधामों में दिखाई पड़ती है। इसकी एक बड़ी वजह सुविधाओं की भारी कमी होना भी है, वहीं प्रचार प्रसार की कमी के चलते भी चारधामों के शीतकालीन मंदिर खाली नजर आते हैं।

उत्तराखंड एक पहाड़ी प्रदेश है, यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन जिस तरह से चारधामों को लेकर सरकार का रुख है, वो बेहद चिंता जनक है, अगर सरकारें अपने संसाधनों का भरपूर उपयोग नहीं करेंगी तो भी नए रोजगारों का सृजन कैसे होगा? उत्तराखंड में चारधामों की शीतकालीन यात्रा को लेकर भी सरकारों का रुख साकारात्मक कम ही नजर आया है। फिर चाहे वो राज्य बनने के बाद पहली बनी सरकार हो या फिर मौजूदा सरकार, किसी ने भी शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए गंभीरता नहीं दिखाई। असल में चारधाम यात्रा हो या फिर शीतकालीन चारधाम सभी का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। और श्रद्धालुओं की इन धामों को लेकर गहरी आस्था भी है। ऐसे में अगर सरकारें ध्यान दें तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि उत्तराखंड का पर्यटन उद्योग मजबूत होगा

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