जानें वह वजह जिससे दिल्ली को मिला सिग्नेचर ब्रिज

जानें वह वजह जिससे दिल्ली को मिला सिग्नेचर ब्रिज

14 सालों के लंबे इंतजार के बाद राजधानी दिल्ली के बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज का हुआ उद्घाटन

Jantantra Tv Desk

November 6,2018 11:51

14 सालों के लंबे इंतजार के बाद राजधानी दिल्ली के बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाघाटन 4 नवंबर को कर दिया गया। बता दें कि इस ब्रिज को बनाने की कबायत साल 2004 में शीला दीक्षित सरकार के वक्त हो गई थी, लेकिन तब से इस ब्रिज को बनने में 14 साल का समय लग गया।

यमुना के ऊपर बने इस ब्रिज के बनने से उत्तर और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बीच सफर करनेवाले लोगों के समय में बचत तो होगी ही इसके साथ ही साथ वजीराबाद पुल के ऊपर लगने वाले ट्रैफिक से लोगों को छुटकारा भी मिलेगा।

उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस ब्रिज को लेकर कहा था कि- पेरिस के एफिल टावर की तरफ सिग्नेचर ब्रिज के टॉप से शहर के विशाल दृश्य को देखकर एंज्वॉय किया जा सकेगा। चार एलिवेटर्स के जरिए विजिटर्स को ब्रिज के टॉप पर ले जाया जा सकेगा, जिसकी कुल क्षमता 50 लोगों की होगी।

यह ब्रिज दिल्लीवासियों के लिए एक अच्छी सौगात है, जिसे पाकर दिल्लीवासी जरूर खुश होंगे।

दिल्ली के आइकोनिक सिग्नेचर ब्रिच की खासियत

इस ब्रिज में एक नहीं बल्कि कई ऐसी खासियते हैं जो इसको भारत में होने वाले और ब्रिजों से खास बनाती हैं।

1- यह सिग्नेचर ब्रिज देश का पहली केबल स्टाइल ब्रिज है, जो नमस्ते के रूप में दिखाई देता है। दूसरे चरण में इस ब्रिज को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा।

2- ब्रिज के ऊपर बने ग्राफिक्स भारत के आधुनिक और प्रगतिशीलता को प्रदर्शित कर रहा है।

3- ब्रिज पर 154 मीटर हाई ग्लास व्यूइंग बॉक्स है जो कुतुब मीनार की ऊंचाई से करीब दोगुनी है। 575 मीटर लंबा यह ब्रिज सेल्फी स्पॉट भी होगा।

4- सिग्नेचर ब्रिज में आठ लेन बनाई गई हैं जो वजीराबाद रोड को आउटर रिंग रोड से जोड़ती है। जिससे गाजियाबाद की तरफ जाने वालों का कम से कम 30 मिनट का समय बचेगा।

5- इस ब्रिज से यहां के आसपास की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। क्योंकि इस ब्रिज का निर्माण होने के बाद न सिर्फ एनसीआर बल्कि देश और दुनिया से लोग इसको देखने के लिए आएंगे।

किस वजह से शुरू हुई थी इस पुल को बनाने की कवायद

18 नवंबर, 1997 को वजीराबाद में यमुना पर बने पुल पर बस दुर्घटना हुई थी । इस दुर्घटना में कश्मीरी गेट पर स्थित लडलो कैसल नंबर 2 की स्कूल बस बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। जब बस वजीराबाद  में युमना पर बने दो लेन के ब्रिज से गुजरी तो वो एक बालू के ढेर से जा टकरायी और अनियंत्रित होकर यमुना नदी में जा गिरी। जिसमें 28 स्कूली बच्चों की मौत  हो गई थी।

उस पुल पर भयावह जाम होने के कारण और पुल के सकरा होने के कारण  इस घटना के करीब 40 मिनट बाद वहां पर पहला फायर इंजन और क्रेन घटनास्थल पर पहुंच पाई, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।

घटना के बाद काफी हंगामा मचा था। उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा थे। उन्होंने मामले की मैजिस्ट्रेट जांच कराने और स्कूल के प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने की घोषणा की थी।

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