उत्तर प्रदेश में बढ़ते \’गन कल्चर\’ और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को धड़ल्ले से जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और सभी वरिष्ठ पुलिस अफसरों को कटघरे में खड़ा करते हुए एक ऐसा सवाल पूछा है, जिसने प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
हाईकोर्ट ने सीधे तौर पर पूछा है—\”आखिर गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने वाले बाहुबलियों और दबंग नेताओं को किस आधार पर हथियारों के लाइसेंस बांट दिए गए?
हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के 19 सबसे रसूखदार और चर्चित नामों का पूरा ब्योरा तलब कर लिया है। कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है कि इन लोगों को किन परिस्थितियों में शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए, इन पर कितने मुकदमे दर्ज हैं और इन्हें किस स्तर की सरकारी सुरक्षा दी गई है।
इन प्रमुख नामों पर टिकी हैं सबकी नजरें:
- बृजभूषण शरण सिंह (पूर्व सांसद)
- रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया (विधायक)
- धनंजय सिंह (पूर्व सांसद)
- बृजेश सिंह (पूर्व एमएलसी)
- विनीत सिंह (एमएलसी)
- अब्बास अंसारी (विधायक)
- खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंगला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव और जुगनू वालिया समेत अन्य नाम।
- हलफनामे के आंकड़े देख चौंक गए जज साहब!
यह पूरा मामला तब सामने आया जब संतकबीर नगर के रहने वाले जयशंकर नामक व्यक्ति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की। याचिकाकर्ता का आरोप है \”उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस जारी करने और उनके रिन्यूअल (नवीनीकरण) में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आपराधिक बैकग्राउंड वाले लोग हथियारों के दम पर सरेआम खौफ पैदा कर रहे हैं, जिससे समाज में एक खतरनाक \’गन कल्चर\’ पनप रहा है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान जब प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में हलफनामा (Affidavit) दाखिल किया गया, तो उसमें मौजूद आंकड़ों और रसूखदारों को मिले लाइसेंसों की संख्या देखकर खुद कोर्ट भी हैरान रह गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त हिदायत देते हुए आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक इन सभी 19 लोगों के:
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एकदम सटीक और वर्तमान पते,
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उनके खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मुकदमों का इतिहास (Crime History),
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उनके पास मौजूद शस्त्र लाइसेंसों का पूरा विवरण,
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और उन्हें मुहैया कराई गई सरकारी सुरक्षा (Security) की पूरी विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद उत्तर प्रदेश का गृह विभाग और पुलिस महकमा इन बाहुबलियों के खिलाफ क्या रिपोर्ट सौंपता है और क्या इनके हथियारों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे? इस सनसनीखेज मामले की पल-पल की अपडेट के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।