उत्तर प्रदेश में इन दिनों ‘पद की पावर’ और ‘नाम की गर्मी’ का अलग ही सीजन चल रहा है। ताजा एपिसोड मऊ रेलवे स्टेशन से सामने आया है, जहां पार्सल भेजने की जगह कथित तौर पर ‘धमकी पार्सल’ कर दी गई। पार्सल अधीक्षक और आरपीएफ जवान के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में मऊ रेलवे स्टेशन के पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह एक आरपीएफ जवान से उलझते नजर आ रहे हैं। बहस इतनी आगे बढ़ गई कि कथित तौर पर शब्दों की मर्यादा प्लेटफॉर्म टिकट के बिना ही बाहर निकल गई। वीडियो में अधीक्षक कहते सुनाई दे रहे हैं
“हम सिंह हैं… तोहार औकात का बा… आंख निकाल लेब तोहार…”
अब सवाल यह है कि रेलवे स्टेशन पर पार्सल बुक हो रहा था या फिर ‘पद का प्रदर्शन’?
जानकारी के अनुसार, आरपीएफ जवान अमित कुमार यादव विलासपुर में तैनात हैं और छुट्टी पर अपने गृह जनपद मऊ के घोसी आए हुए थे। वे पार्सल की समस्या के लिए स्टेशन पहुंचे थे। लेकिन कामकाज की जगह बहस की बुकिंग हो गई और मामला कैमरे में कैद हो गया।
वीडियो में जहां पार्सल अधीक्षक का लहजा आक्रामक दिखता है, वहीं जवान संयमित अंदाज में जवाब देते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं— “सरकारी दफ्तरों में सेवा मिलती है या ‘सिंह गर्जना’?”
प्रदेश में पिछले कुछ समय से अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तीखी झड़पों के वीडियो सामने आ रहे हैं। हर घटना के बाद वही पुराना सवाल— “कड़ी कार्रवाई होगी”— या फिर फाइल ठंडी। मऊ का यह वीडियो भी लोगों को यही सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या सरकारी कुर्सी अब संवाद का मंच है या दबंगई का स्टेज?
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। लोग पार्सल अधीक्षक के व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो को रेलवे प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जनतंत्र टीवी भी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।
अब देखना यह है कि इस मामले में जांच की ट्रेन कितनी तेज दौड़ती है— या फिर यह भी किसी प्लेटफॉर्म पर खड़ी-खड़ी सीटी बजाती रह जाएगी।















