समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार में एक बार फिर राजनीतिक और पारिवारिक विवाद सुर्खियों में आ गया है।
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मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा यादव से तलाक देने का ऐलान कर दिया है। यह घोषणा उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट के माध्यम से की, जो तेजी से वायरल हो रही है।


1. अखिलेश यादव vs शिवपाल यादव का प्रमुख विवाद (2012-2018)
- 2012 में मुलायम सिंह ने अपने बड़े बेटे अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया, जबकि मुलायम यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव खुद को उत्तराधिकारी मानते थे और पार्टी में नंबर-2 की भूमिका निभा रहे थे।
- इससे परिवार दो खेमों में बंट गया: एक तरफ अखिलेश , दूसरी तरफ मुलायम और शिवपाल।
- 2016 में विवाद चरम पर पहुंचा: अखिलेश ने शिवपाल के करीबियों को कैबिनेट से हटाया, मुलायम ने अखिलेश को पार्टी से निकाला (बाद में वापस लिया) और शिवपाल ने 2018 में अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई।
- इस फूट से समाजवादी पार्टी को 2017 विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हुआ, और भाजपा की जीत आसान हो गई।
2. अपर्णा यादव का भाजपा में जाना (2022)
- मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव (जो पहले सपा में सक्रिय थीं) ने 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा जॉइन कर लिया।
- यह फैसला परिवार में तनाव का कारण बना, क्योंकि अपर्णा ने सपा छोड़कर भाजपा के लिए प्रचार किया। बाद में वे यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष बनीं।
- यह घटना परिवार की एकता पर सवाल उठाने वाली थी, खासकर जब मुलायम बीमार थे।
3. अन्य पुराने विवाद
- अमर सिंह का प्रभाव: मुलायम के करीबी अमर सिंह पर परिवारवाद और पार्टी में बाहरी हस्तक्षेप के आरोप लगे, जिससे अखिलेश और शिवपाल के बीच खाई बढ़ी।
- आय से अधिक संपत्ति मामला: मुलायम, अखिलेश और परिवार के कई सदस्यों पर CBI जांच हुई, जिसमें संपत्ति के स्रोत पर सवाल उठे।
- पारिवारिक संपत्ति और राजनीतिक पदों का बंटवारा: परिवार के कई सदस्य (जैसे धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, आदित्य यादव) राजनीति में हैं, लेकिन पदों और टिकटों को लेकर अक्सर असंतोष रहा।
वर्तमान स्थिति (2026 तक)
- मुलायम के निधन के बाद विवाद कम हुए हैं। शिवपाल यादव वापस सपा में लौट आए, और अखिलेश पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।
- हालिया घटना (जनवरी 2026): प्रतीक यादव ने अपर्णा से तलाक का ऐलान किया, जो परिवार की नई कलह का संकेत है, लेकिन पुराने विवादों जितना बड़ा राजनीतिक प्रभाव नहीं।
मुलायम परिवार की राजनीति में परिवारवाद हमेशा चर्चा का विषय रहा है, जहां सत्ता और विरासत की लड़ाई ने कई बार पार्टी को कमजोर किया।
















