पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उम्मीदवारों की अपनी बहुप्रतीक्षित पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची के सामने आते ही बंगाल की सियासत में ‘चुनावी भूकंप’ आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें राजनीति का ‘चेस मास्टर’ क्यों कहा जाता है। अपनी सत्ता और किले को बचाने के लिए उन्होंने एक ही झटके में अपने 74 मौजूदा विधायकों को मैदान से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
राजनीतिक गलियारों में इसे टीएमसी के भीतर अब तक की सबसे बड़ी ‘सियासी सर्जिकल स्ट्राइक’ कहा जा रहा है। ममता बनर्जी और उनके रणनीतिकारों ने इस बार पुराने रिश्तों या रसूख के बजाय सिर्फ और सिर्फ ‘विनिंग फैक्टर’ और ‘क्लीन इमेज’ को तवज्जो दी है।
2021 के बाद से बंगाल सरकार लगातार शिक्षक भर्ती घोटाले और अन्य भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही है। विपक्ष ने इसे अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया था, लेकिन ममता ने टिकट काटकर विपक्ष के हाथ से यह मुद्दा ही छीन लिया।
कभी टीएमसी की कोर कमेटी की जान रहे पार्थ चटर्जी, माणिक भट्टाचार्य और जीवनकृष्ण साहा जैसे नेताओं को पार्टी ने दूध में से मक्खी की तरह बाहर फेंक दिया है। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि ‘कटमनी’ और घोटालों का दाग लेकर कोई भी नेता उनके नाम पर वोट नहीं मांग सकता।
टीएमसी हमेशा से टॉलीवुड सितारों को चुनावी मैदान में उतारने के लिए जानी जाती रही है, लेकिन इस बार ‘ग्लैमर’ पर ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ भारी पड़ी है। मशहूर अभिनेता और विधायक कांचन मल्लिक और चिरंजीत चक्रवर्ती जैसे बड़े नामों के टिकट काट दिए गए हैं।
विशेष रूप से कांचन मल्लिक का टिकट कटना चर्चा का विषय है। सूत्रों के अनुसार, उनकी निजी जिंदगी और सोशल मीडिया पर उनकी बयानबाजी से उपजे विवादों ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाया था, जिसे ममता ने बर्दाश्त नहीं किया। संदेश बिल्कुल साफ है: या तो जनता के बीच काम करो और अपनी छवि साफ रखो, या फिर घर बैठो। पार्टी अब किसी भी अलोकप्रिय या विवादित नेता का बोझ ढोने के मूड में नहीं है।
74 विधायकों को बाहर करना पार्टी के भीतर एक बड़े पीढ़ीगत बदलाव (Generational Shift) का संकेत है। इसे अभिषेक बनर्जी की पार्टी पर बढ़ती पकड़ के रूप में भी देखा जा रहा है। बाहर किए गए नेताओं में कई ऐसे ‘क्षेत्रीय क्षत्रप’ शामिल हैं जो दशकों से अपने इलाकों में काबिज थे, लेकिन उनकी ग्राउंड रिपोर्ट नकारात्मक थी।
तपन दासगुप्ता, ज्योत्सना मंडी, तजमूल हुसैन, असित मजूमदार, परेश पाल, स्वर्णकमल साहा, विकास रॉयचौधुरी और विवेक गुप्ता जैसे नेताओं को एंटी-इंकंबेंसी और गुटबाजी के चलते बाहर किया गया है।
रणनीति के तहत टीएमसी ने 15 विधायकों की सीटें बदल दी हैं, जिनमें अभिनेता शोभन चक्रवर्ती भी शामिल हैं। यह कदम सत्ता विरोधी लहर को कम करने और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए उठाया गया है। वहीं, 135 विधायकों को उनकी पुरानी सीटों पर बरकरार रखा गया है, जिसका मतलब है कि जिनका रिपोर्ट कार्ड अच्छा रहा, पार्टी ने उन पर अपना भरोसा अटूट रखा है।















