पश्चिम बंगाल की राजनीति में आधुनिक चकाचौंध और बड़े-बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों का दौर आ गया है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए आज भी उनके कालीघाट स्थित घर का एक 10/12 का छोटा सा कमरा ही सत्ता की सबसे बड़ी चाबी है। एक बार फिर ‘दीदी’ ने इसी सादगी भरे कमरे से अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर यह साफ कर दिया कि वह अपनी जड़ों और अपने ‘लकी’ स्थान को कभी नहीं छोड़तीं।
दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी के आवास के ठीक दूसरी तरफ एक भव्य और आधुनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस रूम (हॉल) बनवाया गया है। इसमें तमाम आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन जब भी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम तय करने या उनकी घोषणा करने की बारी आती है, तो ममता दीदी उसी पुराने और संकरे कमरे को चुनती हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कमरा ममता बनर्जी की कई ऐतिहासिक जीत का गवाह रहा है। उनके समर्थकों और खुद दीदी का मानना है कि इस कमरे से उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करना उनके लिए बेहद शुभ होता है।
वक्त बदल गया, ममता बनर्जी विपक्ष की नेता से राज्य की मुख्यमंत्री बन गईं, लेकिन इस कमरे की सादगी जस की तस है। पुराने दिनों को याद करने वाले बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने से पहले भी ममता इसी कमरे में पत्रकारों के साथ बैठकर ‘आलू चप’ और ‘मुड़ी’ (आलू पकोड़ा और मुरमुरा) खाते हुए घंटों राजनीतिक चर्चा किया करती थीं। आज भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वही पुराना लगाव नजर आता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी काफी खुशमिजाज और हंसी-मजाक के मूड में थीं। उनके साथ मंच पर अभिषेक बनर्जी और सुब्रत बख्शी भी मौजूद थे। हालांकि, माहौल तब थोड़ा तनावपूर्ण हो गया जब एक पत्रकार ने बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ाने को लेकर सवाल पूछ लिया।
सवाल सुनते ही दीदी का पारा चढ़ गया। शुरुआत में उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि इस बारे में उनसे कोई सवाल न किया जाए, हालांकि बाद में उन्होंने सधे हुए अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर ममता ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उनकी चुनावी रणनीति इसी छोटे कमरे से सफल होगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह कमरा अब केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है।















