पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए भगवंत मान सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। 1 अप्रैल से राज्य के सरकारी स्कूलों में एक नया ‘रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट सिस्टम’ लागू होने जा रहा है। अब यदि कोई छात्र स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो उसके माता-पिता को तुरंत उनके मोबाइल फोन पर सूचना मिल जाएगी।
हैरानी की बात यह है कि यह नियम सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षकों पर भी लागू होगा। यदि कोई टीचर स्कूल नहीं आता है, तो इसकी जानकारी भी अभिभावकों तक पहुँचाई जाएगी।
शिक्षा विभाग ने इस नई व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया है। स्कूलों के लिए ई-पंजाब पोर्टल पर एक नया हाजिरी मॉड्यूल जोड़ा गया है। स्कूल खुलने के बाद तय समय सीमा के भीतर ऑनलाइन हाजिरी लगाना अनिवार्य होगा। जैसे ही छात्र को ‘एब्सेंट’ मार्क किया जाएगा, ऑटोमैटिक एसएमएस जेनरेट होकर अभिभावक के पास पहुँच जाएगा।
यदि कोई छात्र लगातार 2 दिन तक स्कूल नहीं आता है, तो स्कूल स्टाफ सीधे परिवार से संपर्क करेगा और अनुपस्थिति का ठोस कारण जानने का प्रयास करेगा। स्कूल के प्रिंसिपल को इस व्यवस्था का ‘नोडल अधिकारी’ बनाया गया है। उनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी शिक्षकों और छात्रों का डेटा पोर्टल पर सही और अपडेटेड रहे।
इस पहल की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि शिक्षा को मजबूत करने के लिए जवाबदेही सबसे जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस एसएमएस अलर्ट सिस्टम का उद्देश्य पैरेंट्स को उनके बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों से सीधे जोड़ना है, ताकि सरकारी स्कूलों पर जनता का भरोसा और मजबूत हो सके।
इस नई योजना का खुलासा हाल ही में आयोजित राज्यव्यापी मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) के दौरान किया गया। इस कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें करीब 18 लाख से ज्यादा अभिभावकों ने हिस्सा लिया। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इसे देश का सबसे बड़ा ‘स्कूल समुदाय जुड़ाव अभियान’ करार दिया। इस PTM के दौरान न केवल रिपोर्ट कार्ड बांटे गए, बल्कि बच्चों के व्यवहार, स्वास्थ्य और प्रोजेक्ट्स पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
पंजाब सरकार का यह कदम राज्य के व्यापक शिक्षा सुधार अभियान का हिस्सा है। भारी-भरकम शिक्षा बजट और आधुनिक सुविधाओं के साथ पंजाब अब उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जो ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ के जरिए स्कूलों की निगरानी कर रहे हैं। इस कदम से न केवल छात्रों के ड्रॉपआउट की दर में कमी आएगी, बल्कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित होने से शिक्षा की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार की उम्मीद है।















