शिक्षा मंत्रालय में आग, तो लोग बोले- “लो जी, सारे सबूत ‘स्वाहा’ हो गए!

देश में इस वक्त शिक्षा व्यवस्था का ‘मौसम’ वैसे ही काफी गर्म चल रहा है। नीट (NEET) का बवाल, पेपर लीक के आरोप और परीक्षा सिस्टम पर उठते सवालों ने पहले ही माहौल में ‘आग’ लगा रखी थी। लेकिन सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी खबर आई, जिसने सोशल मीडिया के ट्रोलर्स को बैठे-बिठाए ‘घी’ दे दिया।

दिल्ली के आईटीओ (ITO) स्थित विकास मार्ग पर शिक्षा मंत्रालय से जुड़े स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) कार्यालय की दूसरी और तीसरी मंजिल पर अचानक आग लग गई। इमारत से उठते काले धुएं को देखकर इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि दमकल की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अधिकारी अब आग लगने के ‘असली कारण’ की तलाश में जुटे हैं। लेकिन जनाब, इंटरनेट की जनता तो अंतर्यामी है! जनता को कारण पहले ही समझ आ गया है।

‘क्रोनोलॉजी’ समझिए: सुबह वेबसाइट ठप, दोपहर में ऑफिस में ‘स्वाहा’!

कहते हैं कि विपत्ति कभी अकेले नहीं आती। आज ही के दिन (1 जून) सीबीएसई 12वीं के छात्रों को अपनी कॉपियों के री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की खिड़की खुलने का इंतजार था। बोर्ड पहले ही तारीख बढ़ा चुका था, लेकिन आज जैसे ही छात्रों ने वेबसाइट खोली, वहां ‘अंडर मेंटेनेंस’ का बोर्ड लटका मिला।

अब एक तरफ सीबीएसई का पोर्टल ‘ठप’ और दूसरी तरफ शिक्षा मंत्रालय की बिल्डिंग से उठता ‘धुआं’… सोशल मीडिया यूजर्स के लिए यह ‘परफेक्ट टाइमिंग’ थी। फिर क्या था, मीम्स और तंज की ऐसी बाढ़ आई कि मंत्रालय के अफसर भी अपना सिर पकड़ लें।

सोशल मीडिया पर ‘फाइलें’ ढूंढ रही जनता, आए ऐसे-ऐसे कमेंट्स

जैसे ही आग का वीडियो वायरल हुआ, लोगों ने इसे हालिया परीक्षा घोटालों और पेपर लीक विवादों से जोड़ दिया। ट्विटर (X) पर लोगों का गुस्सा और क्रिएटिविटी दोनों सातवें आसमान पर दिखे:

  • “न रहेगा कागज, न होगी जांच!”एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा— “वाह! क्या टाइमिंग है. परीक्षा घोटाले की जांच की मांग चल रही थी और यहां शिक्षा मंत्रालय के ऑफिस में ही आग लग गई. अब न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। नो डॉक्यूमेंट्स, नो जांच!”
  • “पानी फेरने का नया तरीका”एक अन्य यूजर ने हंसने वाले इमोजी के साथ लिखा— “हीहीहीही… है ना मस्त तरीका! जो जरूरी डॉक्यूमेंट्स आग में जलने से बच गए होंगे, वो फायर ब्रिगेड वाले पानी से नष्ट हो जाएंगे। कहानी खत्म!”
  • उम्मीद है सिर्फ फर्नीचर जला होगा…एक गंभीर तंज कसते हुए यूजर ने लिखा— “उम्मीद है इस आग में सिर्फ सरकारी कुर्सी-मेज जले होंगे, जरूरी फाइलें नहीं। कहीं ऐसा न हो कि छात्रों के सवालों के जवाब देने से पहले ही महत्वपूर्ण फाइलें राख का ढेर बन जाएं।”
  • सवालों की आग, मंत्रालय तक पहुंची एक और कमेंट आया— “जब बाहर छात्रों के गुस्से और सवालों की आग लगी हो, तो मंत्रालय के अंदर की आग तो बस एक रिफ्लेक्शन है।”

राहत की बात बस यही रही कि इस हादसे में किसी जान का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इस ‘आग और धुएं’ ने पहले से ही विवादों के घेरे में घिरे शिक्षा मंत्रालय की साख पर जो सोशल मीडियाई ‘कालीख’ पोती है, उसे साफ करने में दमकल विभाग का पानी भी कम पड़ जाएगा। अब देखना यह है कि इस आग में सिर्फ फाइलें सुरक्षित बची हैं या जनता का भरोसा भी?

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