उत्तर प्रदेश की सियासत में एक पुरानी कहावत थी कि जो मुख्यमंत्री नोएडा आता है, उसकी कुर्सी चली जाती है। लेकिन आज वक्त बदल चुका है। 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है और दिलचस्प बात यह है कि इस बार ‘सत्ता की चाबी’ उसी नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) में खोजी जा रही है, जिसे कभी ‘अशुभ’ माना जाता था।
अगले एक महीने के भीतर नोएडा की धरती पर रैलियों का जो सैलाब उमड़ने वाला है, वह तय करेगा कि 2027 में लखनऊ के सिंहासन पर कौन बैठेगा।
हाल ही में 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एशिया के सबसे बड़े जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर इसे भाजपा के ‘विकास मॉडल’ का चेहरा बना दिया है। भाजपा इस प्रोजेक्ट के जरिए पश्चिमी यूपी की करीब 100 सीटों पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी का संदेश साफ है—जेवर एयरपोर्ट सिर्फ हवाई पट्टी नहीं, बल्कि यूपी के विकास का ‘रनवे’ है।
भाजपा के विकास कार्ड को चुनौती देने के लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने 29 मार्च को दादरी के मिहिर भोज डिग्री कॉलेज से अपनी ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ की शुरुआत की। अखिलेश की नजर यहां के मजबूत ‘गुर्जर’ वोट बैंक और पिछड़े वर्गों (PDA) पर है। दादरी में उमड़ी भीड़ ने यह संकेत दे दिया है कि समाजवादी पार्टी 2027 में पश्चिमी यूपी के किले में सेंध लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
इस सियासी घमासान में अब निषाद पार्टी ने भी एंट्री मार दी है। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने घोषणा की है कि 5 अप्रैल को नोएडा के इंडोर स्टेडियम में एक विशाल जनसभा होगी। संजय निषाद ने साफ कहा है कि जहां-जहां भाजपा हारी है, वहां निषाद पार्टी चुनाव लड़ने को तैयार है। सपा की तरह निषाद पार्टी भी गुर्जर समाज को साधने में जुटी है, जिसके लिए विशेष आमंत्रण भेजे गए हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा अब सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी है। फिल्म सिटी, डेटा सेंटर और भारी विदेशी निवेश के कारण यहां का राजनीतिक प्रभाव दिल्ली-एनसीआर तक फैलता है। यहां का शहरी वोटर और ग्रामीण (गुर्जर-ठाकुर-दलित) गठजोड़ जिस तरफ झुकता है, उसका असर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 140 सीटों पर पड़ता है। अब नेता नोएडा आने से डरते नहीं, बल्कि यहां से अपनी ताकत दिखाना ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है।
2027 की लड़ाई: किसका पलड़ा भारी?
| पार्टी | मुख्य हथियार | प्रभाव क्षेत्र |
| बीजेपी | जेवर एयरपोर्ट, कानून व्यवस्था | शहरी मध्यवर्ग और विकास प्रेमी |
| सपा | PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) | गुर्जर बहुल और ग्रामीण क्षेत्र |
| निषाद पार्टी | आरक्षण और हक की लड़ाई | नदी तटीय समाज और पिछड़े वर्ग |
नोएडा की फिजाओं में चुनावी गर्मी अभी से महसूस होने लगी है। जेवर की ‘उड़ान’ से लेकर दादरी की ‘भाईचारा रैली’ और अब निषाद पार्टी का ‘हुंकार’—यह साफ कर रहा है कि 2027 का रास्ता इसी हाई-टेक शहर की गलियों से होकर गुजरेगा।














