असम विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस के भीतर का ‘अंतर्कलह’ अब एक बड़े ज्वालामुखी की तरह फट गया है। सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के तीखे तेवरों ने न केवल राज्य इकाई, बल्कि दिल्ली तक पार्टी आलाकमान की नींद उड़ा दी है।
असम में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का ‘हाथ’ खुद उसका साथ छोड़ता नजर आ रहा है। नौगांव से कद्दावर सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी आलाकमान को पत्र लिखकर जो धमाका किया है, उसने कांग्रेस की चुनावी तैयारियों की धज्जियां उड़ा दी हैं। बोरदोलोई ने सीधे तौर पर लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई की चुप्पी और लाहोरीघाट विधायक आसिफ नज़र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
बोरदोलोई का आरोप है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके काफिले पर हमला करने वाले मुख्य आरोपी इमदादुल इस्लाम को विधायक आसिफ नज़र का संरक्षण प्राप्त है। मामला तब और बिगड़ गया जब बोरदोलोई ने सबूत के तौर पर कुछ तस्वीरें आलाकमान को भेजीं, जिसमें गौरव गोगोई कथित तौर पर उसी आरोपी के साथ बैठे नजर आ रहे हैं।
बोरदोलोई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगर लाहोरीघाट सीट से आसिफ नज़र को दोबारा टिकट दिया गया, तो वह कांग्रेस से इस्तीफा दे सकते हैं। बोरदोलोई इस बात से आहत हैं कि जब दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक में उन पर सवाल उठे, तो गोगोई ने उनके पक्ष में एक शब्द भी नहीं बोला।
यूपी के सांसद इमरान मसूद द्वारा बोरदोलोई के सबूतों को ‘झूठा’ बताए जाने से सांसद खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व के सामने मेरे बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणियों से मुझे गहरा दुख पहुँचा है। ऐसे माहौल में काम करना मुश्किल है।
फिलहाल गौरव गोगोई और आसिफ नज़र ने इस ‘लेटर बम’ पर चुप्पी साध रखी है। लेकिन अगर कांग्रेस आलाकमान ने जल्द ही डैमेज कंट्रोल नहीं किया, तो असम में बीजेपी के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का सपना देख रही कांग्रेस चुनाव से पहले ही बिखर सकती है।
















