भारत में विमान हादसे राजनीति के इतिहास में कई बार हुए हैं और हर बार इन हादसों ने देश को झकझोर दिया है। ये सिर्फ़ एक-दो लोगों की मौत नहीं होतीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर गहरा असर डालती हैं—कभी उत्तराधिकार बदल जाता है, कभी पार्टियों में संकट आ जाता है, तो कभी जनता में शोक की लहर दौड़ जाती है। ऐसी ही दुखद घटनाओं के बारे में हम आपको आज बताएंगे जिनमें कई नेता, अभिनेता और सैन्य अधिकारियों ने अपनी जान गवांई।
सुभाष चंद्र बोस: 1945 में ताइवान में एक विमान दुर्घटना में सुभाष चंद्र बोस की रिपोर्ट की गई मृत्यु भारत के सबसे विवादित ऐतिहासिक प्रसंगों में से एक बनी हुई है, जबकि आधिकारिक विवरण बताते हैं कि विमान की खराबी के कारण लगी चोटों से उनकी मृत्यु हुई, वैकल्पिक सिद्धांतों ने दशकों से सार्वजनिक अटकलों को हवा दी है।
बलवंतराय मेहता- 1963 से 1965 तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 1965 के युद्ध के दौरान मेहता कच्छ के रण में निरीक्षण के लिए उड़ान भर रहे थे। इसी दौरान पाकिस्तान ने उनके विमान को मार गिराया। इस दुर्घटना में मेहता, मेहता की पत्नी, उनके तीन कर्मचारी, एक पत्रकार और दो चालक दल के सदस्यों की मृत्यु हो गई। मेहता पहले बड़े राजनेता थे, जिनकी मृत्यु विमान हादसे में हुई।
डॉ होमी जे भाभा: वैश्विक विमानन इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण विमानन आपदाओं में से एक में डॉ होमी जे भाभा शामिल थे, जो भारत के परमाणु कार्यक्रम के मुख्य वास्तुकार थे। उनकी मृत्यु 1966 में हुई जब वियना जा रही एक एयर इंडिया फ्लाइट फ्रांस में मोंट ब्लांक से टकरा गई, जिसमें विमान में सवार सभी लोग मारे गए और भारत के सबसे प्रमुख वैज्ञानिक दिमागों में से एक का काम रुक गया।
रानी चंद्रा: सिनेमा भी 1976 में त्रासदी से छू गया जब रानी चंद्रा, जो तमिल फिल्म भद्रकाली में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती थीं, बॉम्बे के पास इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट 171 दुर्घटना में अपनी जान गंवा बैठीं। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान गई और यह अपने समय की उल्लेखनीय विमानन आपदाओं में से एक बनी हुई है।
संजय गांधी – 23 जून 1980 – सुबह की पहली किरण जब दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट पर पड़ रही थी, तब 23 जून 1980 को एक युवा, जोश से भरा नेता पवन कटकत करता हुआ पायलट सीट पर बैठा। उनका नाम संजय गांधी था। इंदिरा गांधी के छोटे बेटे, इमरजेंसी का चेहरा, और कई लोगों की नज़रों में भविष्य का प्रधानमंत्री। वो पिट्स एस-2ए विमान उड़ा रहे थे—एक छोटा, तेज़ प्लेन, जिसे वो स्टंट्स के लिए इस्तेमाल करते थे। उस दिन वो बस कुछ एयरक्राफ्ट ट्रिक्स करना चाहते थे। लेकिन कुछ सेकंड्स में ही विमान नियंत्रण से बाहर हो गया। दिल्ली के ऊपर घूमते-घूमते वो नीचे गिरा। टीन मूर्ति के पास धूल-धुआँ उठा। संजय की मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इंदिरा गांधी का घर उदास हो गया। कांग्रेस में सवाल उठने लगे—अब कौन? राजीव गांधी, जो तब तक राजनीति से दूर थे, अचानक सत्ता के केंद्र में आ गए। एक हादसे ने भारत की राजनीति की दिशा बदल दी।
माधवराव सिंधिया – फिर आया 30 सितंबर 2001, माधवराव सिंधिया—ग्वालियर के राजघराने का आखिरी चेहरा, कांग्रेस के दिग्गज, पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री। वो कानपुर की एक रैली के लिए जा रहे थे। छोटा सा Cessna प्लेन, मौसम खराब, और मैनपुरी के पास क्रैश। सिंधिया और उनके साथी—सब खत्म। उनकी मौत ने कांग्रेस में बड़ा संकट पैदा किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया तब बहुत छोटे थे। ग्वालियर की सीट, सिंधिया की विरासत—सब कुछ हिल गया।
जी.एम.सी. बालयोगी- गंती मोहना चंद्र बालयोगी का निधन लोकसभा अध्यक्ष पद पर रहते हुए हो गया था। दरअसल, बालयोगी की मृत्यु एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में हो गई। साल 2002 में आंध्र में एक कार्यक्रम में जाने के दौरान उनका हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। इस हादसे में बालयोगी के सुरक्षा अधिकारी डी. सत्य राजू और पायलट कैप्टन जी.वी. मेनन की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
के एस सौंदर्या: मनोरंजन जगत ने भी 2004 में एक दिल दहला देने वाली क्षति देखी जब के एस सौंदर्या, एक लोकप्रिय फिल्म अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार की मृत्यु हो गई। वह चुनाव प्रचार के लिए यात्रा कर रही थीं जब बेंगलुरु से करीमनगर जाते समय उनके हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
वाई.एस. राजशेखर रेड्डी – 2009 में आंध्र प्रदेश में वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (YSR) हेलीकॉप्टर लेकर हैदराबाद से चित्तूर जा रहे थे। नल्लामला जंगल के ऊपर बादल छाए, विजिबिलिटी जीरो। बेल 430 हेलीकॉप्टर पहाड़ से टकराया। YSR की मौत ने आंध्र को तोड़ दिया। उनकी पार्टी टूट गई, नई Jagan की YSRCP बनी। एक हादसे ने राज्य की सारी राजनीति बदल दी।
जनरल बिपिन रावत: हाल के समय में सबसे विनाशकारी हवाई दुर्घटनाओं में से एक 2021 में कुन्नूर के पास हुआ हेलीकॉप्टर क्रैश था जिसमें भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की जान चली गई। इस दुर्घटना में उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य लोग भी मारे गए, जिसने भारत के रक्षा प्रतिष्ठान को गंभीर झटका दिया और देशव्यापी शोक को जन्म दिया।
विजय रूपाणी – फिर 2025 आया। विजय रूपाणी, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री, लंदन जा रहे थे। एयर इंडिया का ड्रीमलाइनर अहमदाबाद से उड़ा और टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश। 241 लोग मारे गए, रूपाणी भी। BJP में गुजरात की एक पीढ़ी का चेहरा चला गया।
और अब जनवरी 2026। महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार बारामती जा रहे थे—अपने गढ़ में, चुनावी सभाओं के लिए। Learjet 45, लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसला, आग लगी। अजित पवार, उनके स्टाफ, पायलट—सब खत्म। शरद पवार का परिवार फिर टूट गया। महाराष्ट्र की NCP, पवार परिवार की राजनीति—सब हिल गया। बारामती के खेतों में धुआँ उठ रहा था, और पूरे देश में सवाल—क्यों बार-बार? ये हादसे सिर्फ़ मौत नहीं लेते। ये सपने लेते हैं, उत्तराधिकार लेते हैं, और कभी-कभी पूरे राज्यों की दिशा बदल देते हैं। हर बार जब कोई नेता आकाश में उड़ान भरता है, तो नीचे खड़ी जनता बस दुआ मांगती है—सुरक्षित लौट आना। लेकिन इतिहास गवाह है, कई बार वो दुआ पूरी नहीं होती।