भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ओपनर रहे शिखर धवन के लिए पिछला सप्ताह खुशियों की सौगात लेकर आया है। जहां एक तरफ ‘गब्बर’ ने अपनी जिंदगी की नई पारी की शुरुआत करते हुए दूसरी शादी की है, वहीं दूसरी तरफ कानूनी मोर्चे पर भी उन्हें बहुत बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की एक फैमिली कोर्ट ने शिखर धवन की पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी को आदेश दिया है कि वह सेटलमेंट के रूप में लिए गए 5.7 करोड़ रुपये धवन को वापस करें।
यह फैसला न केवल शिखर धवन के लिए व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे वैवाहिक विवादों में भारतीय कानून की संप्रभुता को भी रेखांकित करता है। शिखर धवन और आयशा मुखर्जी के बीच तलाक के बाद संपत्ति के बंटवारे (Property Settlement) को लेकर कानूनी खींचतान चल रही थी। यह मामला तब पेचीदा हो गया जब ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने धवन की वैश्विक संपत्तियों पर फैसला सुना दिया।
ऑस्ट्रेलिया के ‘फैमिली लॉ एक्ट 1975’ के तहत पति की सभी संपत्तियों को एक ‘मेराइटल पूल’ (साझा संपत्ति) माना जाता है। इसी आधार पर वहां की अदालत ने धवन को अपनी भारत और विदेश की संपत्तियों का 60% हिस्सा आयशा को देने का आदेश दिया था।
दिल्ली की फैमिली कोर्ट के जज देवेंद्र कुमार गर्ग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया की अदालत का फैसला भारतीय कानून के साथ मेल नहीं खाता। कोर्ट ने पाया कि ऑस्ट्रेलिया की अदालत ने यह फैसला तब सुनाया जब आयशा कोर्ट में पेश भी नहीं हुई थीं और यह फैसला धवन की इच्छा के पूरी तरह खिलाफ था।
कोर्ट ने कहा कि भारतीय ‘हिंदू मैरिज एक्ट 1955’ के तहत संपत्ति के बंटवारे के नियम अलग हैं। ऑस्ट्रेलिया का ‘प्रॉपर्टी सेटलमेंट’ नियम भारत में पूरी तरह लागू नहीं हो सकता। अदालत ने माना कि शिखर धवन को जबरन 82 हजार डॉलर का भुगतान करना पड़ा था। साथ ही, आयशा ने प्रॉपर्टी बेचकर जो 5.70 करोड़ रुपये हासिल किए थे, उन्हें अब धवन को लौटाना होगा।
क्रिकेट गलियारों में चर्चा है कि शिखर धवन की दूसरी शादी उनके लिए बेहद भाग्यशाली साबित हुई है। शादी के महज कुछ दिनों बाद ही करोड़ों रुपये की वापसी का आदेश मिलना उनके लिए किसी बड़े ‘सिक्सर’ से कम नहीं है। अब आयशा मुखर्जी ऑस्ट्रेलिया के कानून के दम पर धवन की भारतीय संपत्तियों पर दावा नहीं कर सकेंगी।


















