पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान भी नहीं हुआ है, लेकिन सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। नंदीग्राम के ‘टाइगर’ कहे जाने वाले सुभेंदु अधिकारी ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के गढ़ में भाजपा का ‘डेथ वारंट’ जैसा वार है।
जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ के बीच सुवेंदु अधिकारी का अंदाज बदला हुआ था। उन्होंने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के ‘ठोक दो’ मॉडल को बंगाल की मिट्टी पर उतारने का संकल्प लिया। उनके शब्दों में धार थी और निशाने पर राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था। “कान खोलकर सुन लो, ये बुआ-भतीजा की सरकार वाले दिन लदने वाले हैं। अगर बंगाल में कमल खिला, तो यहाँ संविधान की किताब बाद में खुलेगी, पहले अपराधियों का हिसाब होगा। सुबह अगर किसी बलात्कारी के हाथ में हथकड़ी लगेगी, तो शाम को उसका एनकाउंटर तय है। बंगाल को अब कोर्ट की तारीखें नहीं, योगी जैसा न्याय चाहिए।”
सुभेंदु का यह बयान कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी इलेक्टोरल इंजीनियरिंग का हिस्सा है। संदेशखाली जैसी घटनाओं के बाद भाजपा महिलाओं की सुरक्षा को सबसे बड़ा हथियार बना रही है। ‘एनकाउंटर’ की बात कर सुभेंदु सीधे महिला वोटरों को यह संदेश दे रहे हैं कि उनके राज में अपराधी सड़कों पर नहीं, बल्कि ‘मिट्टी’ में मिलेंगे।
बंगाल में योगी आदित्यनाथ की रैलियों में जुटने वाली भीड़ बताती है कि वहां ‘बुलडोजर बाबा’ का क्रेज है। सुभेंदु खुद को उसी सांचे में ढालकर कट्टर समर्थक वर्ग को लामबंद कर रहे हैं। यह बयान सीधे तौर पर ममता सरकार को ‘अपराधियों का संरक्षण देने वाली सरकार’ के रूप में चित्रित करने की कोशिश है।
सुभेंदु के इस बयान के बाद TMC के खेमे में खलबली मची है। सुवेंदु के बयान पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ममता बनर्जी के करीबियों का कहना है कि सुभेंदु ‘लोकतंत्र के भक्षक’ की तरह बात कर रहे हैं। “भाजपा बंगाल को ‘जंगलराज’ बनाना चाहती है। सुभेंदु अधिकारी भूल रहे हैं कि यह रबींद्रनाथ टैगोर और राजा राममोहन राय की धरती है। यहाँ न्याय कानून से होता है, बंदूक से नहीं। हार के डर से भाजपा अब खूनी राजनीति पर उतर आई है।”
सुभेंदु के इस बयान ने बंगाल चुनाव को ‘सिविल सोसाइटी बनाम बुलेट जस्टिस’ का जंग बना दिया है। एक तरफ ममता बनर्जी की ‘मां, माटी, मानुष’ वाली राजनीति है, तो दूसरी तरफ सुभेंदु का ‘अपराधी मुक्त बंगाल’ का वादा, जिसमें न्याय अब गोली की रफ़्तार से भी तेज चलने का दावा किया गया है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता ‘न्याय की प्रक्रिया’ पर भरोसा करती है या सुभेंदु के सुबह जमा और शाम को खर्चा के वादे पर मुहर लगाती है।


















