महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने विधान परिषद में महिलाओं के हित में एक ऐतिहासिक घोषणा की है। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में काम करने वाली महिला सरकारी कर्मचारियों को अब ‘कम अर्ली–गो अर्ली’ (Come Early–Go Early) की सुविधा मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को सफर की दिक्कतों से बचाना और उनके कार्य-जीवन में संतुलन बनाना है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित विशेष चर्चा का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिला कर्मचारी सुबह 9:15 से 9:45 बजे के बीच कार्यालय पहुंचकर अपना काम शुरू कर सकेंगी। जितने मिनट कर्मचारी सुबह पहले काम शुरू करेंगी, शाम को उतने ही मिनट पहले उन्हें घर जाने की अनुमति होगी।
इस योजना के तहत महिलाओं को प्रतिदिन अधिकतम 30 मिनट की छूट मिल सकेगी। इसका मुख्य उद्देश्य पीक आवर (भीड़भाड़ वाले समय) के दौरान लोकल ट्रेनों और सड़कों पर होने वाली यात्रा संबंधी असुविधा को कम करना है।
सुनेत्रा पवार ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, अवसर और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सुरक्षा के मोर्चे पर सरकारी आंकड़ों को भी साझा किया है।
जुलाई 2015 से फरवरी 2026 के बीच 42,594 लापता बच्चों को खोजा गया। इसके माध्यम से 5,066 महिलाओं और 2,771 बच्चों को सुरक्षित ट्रैक किया गया। महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य भर में 51 भरोसा सेल और हर जिले में मिसिंग सेल काम कर रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने राज्य में चल रही प्रमुख महिला केंद्रित योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लाडकी बहिन, नमो महिला सशक्तिकरण, लेक लाडकी, अन्नपूर्णा और लखपति दीदी जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है।
सुनेत्रा पवार ने कहा कि हमारा संकल्प एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ महिलाओं को केवल वादे नहीं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा और समान अवसर मिलें।” — सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आंगनवाड़ी सेविकाओं के मानदेय और बुनियादी सुविधाओं (जैसे 17,254 केंद्रों में पेयजल) पर सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
















