पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एक बार फिर विवादों और मौत के साये में है। अगस्त 2024 के जघन्य अपराध की यादें अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थीं कि एक भीषण हादसे ने अस्पताल प्रशासन की पोल खोल दी है। लिफ्ट में आई तकनीकी खराबी के कारण एक व्यक्ति की दीवार और लिफ्ट के बीच दबकर दर्दनाक मौत हो गई।
मृतक की पहचान अरूप बंद्योपाध्याय के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अरूप करीब एक घंटे तक लिफ्ट और दीवार के बीच फंसे रहे। जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक शरीर की पसलियां, हाथ और पैर कई जगह से टूटे हुए मिले। फेफड़े, दिल और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे। मौत का कारण अत्यधिक चोट और दम घुटना बताया जा रहा है।
परिजनों का आरोप है कि जिस समय यह हादसा हुआ, वहां कोई लिफ्ट ऑपरेटर या सहायक स्टाफ मौजूद नहीं था। चश्मदीदों के अनुसार लिफ्ट अचानक बीच में अटक गई, जिससे अंदर सवार लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लिफ्ट एक फ्लोर पर रुकी तो अरूप ने बाहर निकलने की कोशिश की। बाहर कोलैप्सिबल गेट था, जिसे पार करने से पहले ही लिफ्ट अचानक ऊपर की ओर चल पड़ी।
अरूप का आधा शरीर बाहर और आधा अंदर रह गया, जिससे वह दीवार और लिफ्ट के बीच बुरी तरह कुचल गए। अस्पताल के एमएसवीपी (MSVP) सप्तर्षि चट्टोपाध्याय ने माना है कि मौके पर ऑपरेटर का न होना एक बड़ी प्रशासनिक चूक है।
मृतक के पिता की शिकायत पर टाला पार्क थाने में गैर-इरादतन हत्या की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 5 लोगों को हिरासत में लिया है जिनसे पूछताछ जारी है।
यह वही अस्पताल है जो अगस्त 2024 में एक ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में देशभर में चर्चा में आया था। पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पहले ही भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में जेल में हैं। अब इस ताजा हादसे ने अस्पताल की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर दोबारा सवालिया निशान लगा दिए हैं।















