लोन की वसूली के नाम पर अगर कोई रिकवरी एजेंट आपको धमका रहा है या परेशान कर रहा है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं है। देश के नियामक बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी प्रक्रिया को लेकर कड़े और पारदर्शी नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। हाल के वर्षों में रिकवरी एजेंटों के दुर्व्यवहार की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
आरबीआई का मकसद साफ है—बैंक अपना बकाया वसूल करें, लेकिन कानून और इंसानियत की सीमा के भीतर रहकर। पिछले दिनों धमकी देने, गाली-गलौच करने, परिवार को परेशान करने और अनुचित दबाव बनाने जैसी कई शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं मामलों को ध्यान में रखते हुए ‘सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्शन 2026’ का मसौदा जारी किया गया है। फिलहाल इस पर सुझाव मांगे गए हैं और मंजूरी मिलने के बाद इसे 1 जुलाई 2026 से लागू करने की तैयारी है।
नए प्रावधानों के तहत हर बैंक को लिखित रिकवरी पॉलिसी तैयार करनी होगी। इसमें एजेंटों की नियुक्ति प्रक्रिया, योग्यता, बैकग्राउंड जांच, आचार संहिता और निगरानी व्यवस्था शामिल होगी। बैंकों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और शाखाओं में अधिकृत रिकवरी एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सके कि सामने वाला व्यक्ति अधिकृत है या नहीं।
अगर कोई ग्राहक शिकायत दर्ज कराता है, तो शिकायत के निपटारे तक मामला रिकवरी एजेंट को नहीं सौंपा जाएगा। यानी पहले शिकायत की सुनवाई होगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई।
आरबीआई के मुताबिक अब रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकेंगे। उन्हें कर्जदार की निजी जिंदगी का सम्मान करना होगा। शादी, शोक या त्योहार जैसे मौकों पर कॉल या विजिट से बचना अनिवार्य होगा। रिश्तेदारों, दोस्तों या सहकर्मियों को परेशान करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
हर भुगतान पर रसीद देना अनिवार्य होगा। बैंक को यह रिकॉर्ड भी रखना होगा कि कर्जदार से कितनी बार और किस समय संपर्क किया गया। बातचीत की रिकॉर्डिंग की जाएगी और इसकी जानकारी पहले ग्राहक को दी जाएगी।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि हर रिकवरी एजेंट को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस से डेब्ट रिकवरी एजेंट का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। बिना ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट के कोई भी व्यक्ति वसूली प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगा।
धमकी देना, गाली-गलौच करना, झूठी कानूनी जानकारी देना, सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश करना या किसी भी तरह का मानसिक दबाव बनाना सख्त रूप से प्रतिबंधित रहेगा। ग्राहक की निजी जानकारी भी केवल उतनी ही साझा की जाएगी, जितनी वसूली प्रक्रिया के लिए जरूरी हो। स्पष्ट है कि नए नियमों के बाद रिकवरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे ग्राहकों को अनावश्यक मानसिक प्रताड़ना से राहत मिल सकेगी।





















