नई दिल्ली, 25 दिसंबर 2025: दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अरावली क्षेत्र में किसी भी नई खनन लीज जारी करने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
यह फैसला दिल्ली से गुजरात तक फैली पूरी अरावली पर्वतमाला पर लागू होगा, जहां अब कोई नई खदान नहीं खोली जा सकेगी।यह निर्णय हाल के दिनों में अरावली की नई परिभाषा को लेकर भारी विरोध और प्रदर्शनों के बीच आया है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अरावली पहाड़ियों की एकसमान परिभाषा स्वीकार की थी, जिसमें 100 मीटर से ऊंची भूमि को ही ‘अरावली हिल’ माना गया। इससे आशंका जताई गई कि 90% से अधिक क्षेत्र खनन के लिए खुल सकता है। राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां पर्यावरणविदों, स्थानीय निवासियों और विपक्षी दलों ने #SaveAravalli कैंपेन चलाया।
साथ ही, इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) को अतिरिक्त संरक्षित क्षेत्रों की पहचान करने और सस्टेनेबल माइनिंग प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।अरावली का संरक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह थार मरुस्थल के फैलाव को रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है और जैव विविधता का खजाना है। अवैध खनन से पिछले दशकों में पहाड़ियां छलनी हो चुकी हैं, जिससे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण और जल संकट बढ़ा है। पर्यावरणविदों ने इस फैसले को ‘जनता की जीत’ बताया, हालांकि कुछ का कहना है कि प्रदर्शन जारी रहेंगे जब तक पूरी अरावली को इको-सेंसिटिव जोन घोषित नहीं किया जाता।सरकार ने जोर दिया कि यह फैसला पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अरावली को सुरक्षित करने की प्रतिबद्धता दिखाता है।











