असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य का सियासी पारा चरम पर पहुँच गया है। कछार जिले से आई एक सनसनीखेज खबर ने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। यहाँ देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की 10 फीट ऊंची प्रतिमा को गिरा दिया गया है, जिसके बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच तलवारें खिंच गई हैं।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, कछार जिले में स्थित इस प्रतिमा को गिराने का आरोप भाजपा और आरएसएस (RSS) के कार्यकर्ताओं पर लगा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है।
कांग्रेस नेता प्रदीप कुमार डे ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “शुरुआत में अधिकारियों ने दावा किया कि प्रतिमा खुद-ब-खुद गिर गई, लेकिन सीसीटीवी (CCTV) फुटेज ने सच उजागर कर दिया। फुटेज में साफ दिख रहा है कि एक समूह खुदाई मशीन (Excavator) की मदद से जानबूझकर इसे तोड़ रहा था।”
यह प्रतिमा साल 2000 में नेहरू कॉलेज के सामने स्थापित की गई थी। इस कॉलेज की नींव 1965 में रखी गई थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र में नेहरू के प्रति सम्मान का इतिहास काफी पुराना है। नेहरू के नाम पर पहले हाई स्कूल की स्थापना हुई। नेहरू कॉलेज का निर्माण हुआ। कॉलेज के सामने 10 फीट की प्रतिमा लगाई गई।
स्थानीय पुलिस अधिकारी शंकर दयाल ने पुष्टि की है कि मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई मशीन को जब्त कर लिया है और डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
कांग्रेस ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर स्थानीय भाजपा विधायक और मंत्री कौशिक राय को घेरा है। कांग्रेस के पूर्व जिला प्रमुख अभिजीत पॉल ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह घटना मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में हुई है, लेकिन उनकी चुप्पी भाजपा की संलिप्तता की ओर इशारा करती है।
चुनावों की दहलीज पर खड़े असम में इस घटना ने सांप्रदायिक और वैचारिक ध्रुवीकरण की आशंका बढ़ा दी है। जहाँ कांग्रेस इसे ‘लोकतंत्र और इतिहास पर हमला’ बता रही है, वहीं प्रशासन के लिए निष्पक्ष जांच और शांति व्यवस्था बनाए रखना अब एक बड़ी चुनौती है।


















