असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में दिसंबर 2025 में भड़की हिंसा का मुख्य कारण आदिवासी कार्बी समुदाय की भूमि अधिकारों की रक्षा है। कार्बी संगठनों का आरोप है कि गैर-आदिवासी (मुख्य रूप से बिहार मूल के) लोग विलेज ग्रेजिंग रिजर्व (VGR) और प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व (PGR) की संरक्षित भूमि पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। ये भूमियां संविधान की छठी अनुसूची के तहत कार्बी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल (KAAC) के अधीन संरक्षित हैं। प्रदर्शनकारियों ने बेदखली की मांग को लेकर 12 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की, लेकिन 22 दिसंबर को जब स्वास्थ्य बिगड़ने पर हड़तालियों को अस्पताल ले जाया गया, तो अफवाह फैली कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इससे गुस्सा भड़का और हिंसा शुरू हो गई।
22-23 दिसंबर को खेरोनी इलाके में उग्र भीड़ ने KAAC प्रमुख तुलिराम रोंगहांग के पैतृक घर को आग लगा दी, कई दुकानों में आगजनी की और पुलिस पर पत्थर, तीर व देसी बमों से हमला किया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो लोगों की मौत हुई – एक विकलांग व्यक्ति आग में फंसकर मरा, दूसरा पुलिस गोलीबारी में घायल होकर। 45 से ज्यादा घायल हुए, जिनमें 38 पुलिसकर्मी शामिल हैं। सरकार ने दोनों जिलों में इंटरनेट बंद किया, धारा 163 लगाई और सेना तैनात की।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सामने मुश्किलें कम नहीं हैं। गौहाटी हाईकोर्ट ने बेदखली पर स्टे ऑर्डर दिया है, जिससे सरकार बेबस महसूस कर रही। सरमा ने कार्बी नेताओं से बातचीत की और हाईकोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल करने का फैसला लिया। सरकारी कार्यालयों को स्थानांतरित करने, खाली भूमि पर बाड़ लगाने और वृक्षारोपण की घोषणा की। लेकिन आदिवासी संगठनों का गुस्सा शांत नहीं, वे KAAC प्रमुख को सरमा का करीबी बताकर निशाना बना रहे। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा, जबकि सरमा शांति बहाली को प्राथमिकता बता रहे हैं। क्या कोर्ट से राहत मिलेगी और स्थायी समाधान होगा? फिलहाल तनाव बरकरार है.








