इंदौर, जो लगातार आठ वर्षों से स्वच्छ सर्वेक्षण में भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित होता रहा है, आज एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम की पेयजल लाइन में सीवेज का पानी मिल जाने से दस्त और उल्टी का प्रकोप फैला, जिसमें अब तक 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों अस्पताल में भर्ती हैं। यह घटना न केवल मानवीय त्रासदी है, बल्कि शहर की स्वच्छता की छवि पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाती है।भागीरथपुरा एक घनी आबादी वाला निचले तबके का इलाका है, जहां करीब 15 हजार लोग रहते हैं।
दो महीनों से अधिक समय तक शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जांच में पता चला कि पुलिस चौकी के पास बने शौचालय में सेप्टिक टैंक नहीं था, जिससे सीवेज का गंदा पानी सीधे पेयजल पाइपलाइन में रिस गया। पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों की मरम्मत में देरी और टेंडर प्रक्रिया में लापरवाही ने इस त्रासदी को जन्म दिया। लैब रिपोर्ट्स में ई. कोलाई, साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं।
आधिकारिक तौर पर मौतों की संख्या 6-10 बताई जा रही है, लेकिन स्थानीय लोग और रिपोर्ट्स 15 तक का दावा कर रही हैं। एक छह महीने का शिशु भी इस दूषित पानी से बना दूध पीने से मर गया। अस्पतालों में 200 से अधिक मरीज अभी भर्ती हैं, जिनमें कई आईसीयू में हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी किया है, जबकि हाईकोर्ट ने स्वच्छ पानी की तत्काल आपूर्ति के आदेश दिए हैं।यह विडंबना है कि इंदौर स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में भी टॉप पर रहा, जहां कचरा प्रबंधन, सड़कें और सतही सफाई पर फोकस होता है। लेकिन पेयजल की गुणवत्ता और अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच सर्वेक्षण में कमजोर रही। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऊपरी सफाई तो दिखावटी है, लेकिन पाइपलाइनों की पुरानी स्थिति और सीवेज मिक्सिंग की समस्या वर्षों से चली आ रही है। 2019 की CAG रिपोर्ट में भी इंदौर-भोपाल की जल आपूर्ति में खामियां उजागर हुई थीं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया।
इस घटना ने राजनीतिक तूफान भी खड़ा कर दिया है। भाजपा नेता उमा भारती ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए, जबकि राहुल गांधी ने इसे लापरवाही का नतीजा बताया। नगर निगम आयुक्त को हटाया गया और कई अधिकारी सस्पेंड हुए।इंदौर की यह त्रासदी एक सबक है कि स्वच्छता केवल सतह तक नहीं, बल्कि पेयजल सुरक्षा तक होनी चाहिए। सबसे स्वच्छ शहर का तमगा तब तक बेमानी है, जब तक आम नागरिक को सुरक्षित पानी न मिले। सरकार को अब इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और नियमित मॉनिटरिंग पर फोकस करना होगा, वरना ऐसे हादसे दोहराए जाएंगे।











