लखनऊ/नई दिल्ली, 25 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने उन्नाव रेप कांड की पीड़िता को लेकर विवादित टिप्पणी की है। जब पत्रकारों ने उनसे पीड़िता के दिल्ली में इंडिया गेट पर प्रदर्शन और पुलिस द्वारा हटाए जाने के बारे में सवाल किया, तो राजभर खिलखिलाकर हंस पड़े और बोले, “घर तो उसका उन्नाव में है ना… ही-ही-ही…”। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद राजभर को असंवेदनशीलता के लिए जमकर ट्रोल किया जा रहा है। विपक्षी दलों ने इसे ‘सत्ता का अहंकार’ और ‘पीड़िता की पीड़ा का मजाक’ करार दिया है।

यह विवाद 2017 के चर्चित उन्नाव रेप मामले से जुड़ा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने सेंगर को पीड़िता के घर से 5 किलोमीटर दूर रहने और दिल्ली में ही रहने का निर्देश दिया। इस फैसले से आहत पीड़िता और उसकी मां ने इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया। पीड़िता ने कहा, “यह फैसला हमारे लिए मौत से कम नहीं। सेंगर बाहर आएगा तो हमें मार डालेगा।” हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटा दिया, जिसकी वीडियो में पीड़िता की मां को घसीटते हुए दिखाया गया।
बुधवार को विधानसभा सत्र के लिए जाते समय पत्रकारों ने राजभर से इस घटना पर प्रतिक्रिया मांगी। राजभर ने हंसते हुए कहा, “इंडिया गेट? घर तो उनका उन्नाव में है।” आगे उन्होंने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पूछा, “कोर्ट ने सेंगर जी को 5 किलोमीटर दूर रहने को कहा है, तो असुरक्षित कहां हैं? सुरक्षा तो कोर्ट ने दी है ना।” राजभर की यह हंसी और टिप्पणी संवेदनहीन बताई जा रही है।विपक्ष ने तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़िता से मुलाकात की और कहा, “एक रेप पीड़िता के साथ ऐसा बर्ताव? यह मृत समाज की निशानी है।” कांग्रेस ने राजभर की हंसी को ‘योगी मॉडल’ का प्रतीक बताया। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना, जो पीड़िता के साथ थीं, ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा की और कहा, “पीड़िता की मां को सड़क पर पटक दिया गया। क्या यह न्याय है?”
उन्नाव रेप कांड 2017 में सुर्खियों में आया था, जब नाबालिग पीड़िता का अपहरण कर रेप किया गया। सेंगर पर आरोप था कि उन्होंने पीड़िता को बेच दिया। मामले में पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत और दुर्घटना में रिश्तेदारों की हत्या भी हुई। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से केस दिल्ली ट्रांसफर हुआ और सेंगर को उम्रकैद हुई। अब जमानत पर पीड़िता सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।राजभर के बयान पर उनके बेटे अरुण राजभर ने बचाव किया, “पापा को रोना चाहिए क्या?” लेकिन जनता और विपक्ष में आक्रोश है कि एक मंत्री को पीड़िता की पीड़ा पर हंसना शोभा नहीं देता। यह घटना महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। क्या योगी सरकार इस पर कार्रवाई करेगी? फिलहाल, विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।








