दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे दुनिया भर में अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है। अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक ऐसी 31 वर्षीय महिला की सफल हार्ट सर्जरी की है, जिसके शरीर के सभी अंग जन्मजात रूप से ‘उल्टे’ (शीशे की स्थिति में) थे।
31 वर्षीय रामबाई ‘साइटस इन्वर्सस’ (Situs Inversus) नाम की एक अत्यंत दुर्लभ स्थिति से जूझ रही थीं। इस बीमारी में शरीर के सभी आंतरिक अंग अपनी सामान्य स्थिति के विपरीत होते हैं। दिल सामान्यतः बाईं ओर होता है, लेकिन इनका दिल दाहिनी (Right) ओर था (ड्रेक्स्ट्रोकार्डिया)। लिवर दाईं ओर के बजाय बाईं (Left) ओर था। तिल्ली (Spleen) और पेट: इनका स्थान भी सामान्य से उलट दाईं तरफ था।
इस जटिल शारीरिक संरचना के साथ, महिला ‘कंजेनिटल हार्ट डिजीज’ (जन्मजात हृदय रोग) से भी ग्रस्त थी, जिसके कारण उसे सांस लेने और शारीरिक गतिविधियों में भारी परेशानी हो रही थी।
आरएमएल के सीटीवीएस (CTVS) सर्जरी विभाग के डायरेक्टर और एचओडी डॉ. नरेंद्र झाझरिया और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम दिया। आमतौर पर ऐसी सर्जरी में सीने की हड्डी (स्टर्नम) को बीच से काटना पड़ता है, जो एक दर्दनाक और लंबी रिकवरी वाली प्रक्रिया है।
लेकिन आरएमएल के डॉक्टरों ने अपनी अद्भुत कुशलता का परिचय देते हुए, मरीज के बाएं ब्रेस्ट के नीचे मात्र 4 सेंटीमीटर का छोटा सा ‘कॉस्मेटिक चीरा’ लगाकर यह जटिल सर्जरी पूरी की।
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के लिए अंगों की उल्टी स्थिति के कारण सही नसें और वाल्व ढूंढना बेहद कठिन था। इतने छोटे चीरे के जरिए हार्ट-लंग मशीन (Cardiopulmonary bypass) को शरीर की बाहरी नसों से जोड़ना और दिल के ऊपर की झिल्ली (pericardium) से पैच लगाकर छेद को भरना बहुत ही सटीक सर्जरी की मांग करता था।
डॉ. जसविंदर कौर कोहली (कार्डियक एनेस्थीसिया) और सीनियर परफ्यूजनिस्ट जगदीश चंद्र की टीम ने इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. अशोक कुमार ने इसे विश्व स्तरीय उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह दुनिया में पहली बार हुआ है जब इतनी जटिल शारीरिक बनावट वाले मरीज की सर्जरी इतने छोटे चीरे के साथ सफलतापूर्वक की गई।
30 मार्च को की गई इस सर्जरी के मात्र 5 दिन बाद ही महिला की सेहत में आश्चर्यजनक सुधार हुआ है। ईकोकार्डियोग्राफी में हृदय के सभी फंक्शन सामान्य पाए गए हैं और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय डॉक्टर अत्याधुनिक तकनीकों के साथ किसी भी जटिल चुनौती को पार करने में सक्षम हैं।














