हाल के दिनों में भारत में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की जान को खतरा हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए 13 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के काटने से होने वाली हर मौत, गंभीर चोट या हमले के लिए राज्य सरकारों को भारी मुआवजा (heavy compensation) देना होगा।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि पिछले कई वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारें एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों को ठीक से लागू नहीं कर पाई हैं। कोर्ट ने इसे “पूर्ण विफलता” करार दिया और कहा, “हर कुत्ते के काटने, हर मौत या बच्चों-बुजुर्गों पर हमले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा तय करेंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में कुछ नहीं किया।” कोर्ट ने चेतावनी दी कि समस्या हजार गुना बढ़ गई है और अब जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कोर्ट ने सिर्फ सरकारों को ही नहीं, बल्कि आवारा कुत्तों को खिलाने वालों (डॉग फीडर्स) को भी जिम्मेदार ठहराया। जस्टिस नाथ ने कहा, “अगर आप कुत्तों से इतना प्यार करते हैं, तो उन्हें अपने घर ले जाएं। सड़कों पर क्यों घूमने दें, जहां वे लोगों को काटते और डराते हैं? काटने का असर जीवन भर रहता है।” वर्तमान कानून में पालतू कुत्ते के काटने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा (पहले IPC 289) के तहत मालिक को 6 महीने तक की जेल और 5,000 रुपये तक जुर्माना हो सकता है। गंभीर मामलों में मौत होने पर धारा 304 के तहत 10 साल तक की सजा भी संभव है। लेकिन आवारा कुत्तों के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकारों पर सीधे भारी जुर्माना लगाने की तैयारी में है।
यह फैसला कुत्तों के हमलों से प्रभावित परिवारों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ABC नियमों का सख्ती से पालन होगा, स्टेरलाइजेशन और वैक्सीनेशन बढ़ेगा। अंततः, इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा संतुलित तरीके से सुनिश्चित हो सकेगी। समाज को भी जागरूक होना होगा कि प्यार के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।








