गुवाहाटी में बने नए सेतु का नाम प्राचीन कामरूप के महान शासक कुमार भास्कर वर्मा के नाम पर रखा गया है। यह सिर्फ एक पुल का नामकरण नहीं, बल्कि असम के गौरवशाली इतिहास और स्वर्णिम विरासत को सम्मान देने का प्रतीक है। 7वीं शताब्दी में कामरूप के शासक रहे कुमार भास्कर वर्मा को प्राचीन इतिहास के प्रभावशाली राजाओं में गिना जाता है। उनके शासनकाल को असम का ‘स्वर्ण युग’ कहा जाता है। उन्होंने न केवल अपने राज्य को राजनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कामरूप की पहचान स्थापित की।
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा-वृत्तांत में कामरूप की समृद्ध संस्कृति, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक क्षमता की सराहना की थी। इससे उस दौर में असम की वैश्विक पहचान मजबूत हुई। कुमार भास्कर वर्मा ने उत्तर भारत के सम्राट हर्षवर्धन के साथ मजबूत राजनीतिक और सैन्य गठबंधन बनाया। उनके नेतृत्व में कामरूप राज्य का विस्तार बंगाल, सिलहट और त्रिपुरा तक हुआ।
उनके शासनकाल में व्यापार, शिक्षा, कला और उद्योग तेजी से फले-फूले। बांस, रेशम, अगरवुड और धातु उद्योग उस समय अत्यंत विकसित थे। मजबूत सैन्य रणनीति और कूटनीतिक कौशल के कारण उन्हें ‘अजेय’ शासक माना जाता है। उन्होंने विशाल सेना और शक्तिशाली नौसैनिक बेड़ा तैयार किया, जिसमें हजारों नावें और हाथी शामिल थे। बाहरी आक्रमणों का सफलतापूर्वक मुकाबला करते हुए कामरूप को उत्तर-पूर्व भारत की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में शामिल कर दिया।
नया सेतु गुवाहाटी के शहरी विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अभी तक गुवाहाटी से नॉर्थ गुवाहाटी पहुंचने में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता था। लेकिन इस पुल के बनने से यह सफर घटकर सिर्फ 7 से 10 मिनट रह जाएगा। रोजाना हजारों यात्रियों, छात्रों और व्यापारियों को इससे सीधी राहत मिलेगी।
गुवाहाटी में लगातार बढ़ते वाहनों के कारण सड़कों और पुराने पुलों पर भारी दबाव बन रहा है। खासतौर पर सराईघाट ब्रिज पर अक्सर ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। नया सेतु इस दबाव को कम करेगा और शहर को वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा। यह पुल भारी वाहनों और बढ़ते शहरी ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक से डिजाइन किया गया है।
ब्रह्मपुत्र नदी अपने तेज बहाव और बाढ़ के लिए जानी जाती है। मानसून के दौरान फेरी सेवा बाधित हो जाती थी, जबकि सर्दियों में घना कोहरा आवाजाही में रुकावट पैदा करता था। कुमार भास्कर वर्मा सेतु ऑल-वेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। अब साल भर बिना रुकावट गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी के बीच आवाजाही संभव होगी।
कुमार भास्कर वर्मा के नाम पर सेतु का नामकरण यह संदेश देता है कि आधुनिक विकास की नींव इतिहास की मजबूत विरासत पर टिकी होती है। यह पुल सिर्फ दो किनारों को नहीं जोड़ेगा, बल्कि असम के अतीत के गौरव और भविष्य की संभावनाओं को भी एक साथ जोड़ेगा।





















