केरल में चुनाव से पहले ही कांग्रेस की आपसी मतभेद एक बार फिर सार्वजनिक मंचों पर दिखने लगा है। कांग्रेस की बड़ी बैठकों से लगातार शशि थरूर का अनुपस्थित रहना पार्टी के लिए चिंताजनक स्थिति उतपन्न कर रही है। हालात यह हो गए हैं कि कांग्रेस के कई बड़े नेता राहुल गांधी के बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। मीडिया में इस मुद्दे पर चल रही बहस को देखते हुए भी इस त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस की गई। यह भी संकेत मिलता है कि राहुल गांधी का सीधा हस्तक्षेप अभूतपूर्व है, क्योंकि यह दर्शाता है कि पार्टी थरूर की भावनाओं को समायोजित करने के लिए तैयार है।
कांग्रेस हाईकमान ने राहुल गांधी और शशि थरूर के बीच कथित मतभेदों को दूर करने के लिए पहल की है। यह कदम तब उठाया गया जब थरूर ने केरल विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की ओर से बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग नहीं लिया। राहुल गांधी के कार्यालय ने थरूर से संपर्क कर बैठक में उनकी अनुपस्थिति का कारण पूछा। हालांंकि सांसद की तरफ से बयान दिया गया है कि उन्होंने पहले से ही अनुपस्थिति के बारे में पार्टी के हाईकमान कमान को अवगत करा दिया था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यदि थरूर बैठक में शामिल होते, तो राहुल गांधी उनसे मिलकर तनाव कम करने की कोशिश करते। थरूर के खेमे ने सूचित किया है कि वह 28 जनवरी को संसद सत्र के लिए दिल्ली में होंगे, और उम्मीद है कि दोनों नेता जल्द ही मुलाकात करेंगे।
नेताओं को यह भी पता है कि यह मतभेद पार्टी की एकता के दावों को उजागर कर सकता है, जो वायनाड नेतृत्व बैठक के बाद बनी थी, जिसमें थरूर भी शामिल हुए थे। एक केपीसीसी (Kerala Pradesh Congress Committee) पदाधिकारी ने चिंता जताई कि एक नाराज थरूर से तिरुवनंतपुरम में चुनाव परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह स्थिति तब और बिगड़ सकती है जब सीपीएम और बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत कर लें।





































