उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और डायवर्जन के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें मुख्य आरोपी और सिंडिकेट के किंगपिन विभोर राणा को ड्रग लाइसेंस 2016 में मिलने का जिक्र है। यह लाइसेंस समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में जारी किया गया था, जिस पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।SIT की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट है, जिसमें फार्मास्युटिकल कंसाइनमेंट्स का डायवर्जन, हवाला लेन-देन और क्रिमिनल नेटवर्क शामिल हैं। तस्करी का रूट हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और नेपाल बॉर्डर वाले यूपी जिलों से होता हुआ बांग्लादेश तक फैला हुआ है। रिपोर्ट में नेपाल बॉर्डर पर मदरसा से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई का भी उल्लेख है, जिससे तस्करी रूट अस्थायी रूप से बाधित हुआ। कुछ सूत्रों में टेरर फंडिंग का एंगल भी जांच के दायरे में है, जहां हवाला के जरिए पैसे गल्फ देशों तक पहुंचाए जा रहे थे।
योगी सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अब तक 3.5 लाख से अधिक बोतलें जब्त की गईं, 280 ड्रग लाइसेंस रद्द हुए, 128 FIR दर्ज हुईं और 78 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा में कहा कि यूपी में कोडीन सिरप से एक भी मौत नहीं हुई, लेकिन NDPS एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आरोपी समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं, जैसे आलोक सिंह और अन्य, जिनकी अखिलेश यादव के साथ पुरानी तस्वीरें वायरल हुईं। योगी ने चेतावनी दी कि दोषियों पर बुलडोजर एक्शन भी होगा।विपक्ष में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पलटवार किया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पुरानी तस्वीरें उछाल रही है और महत्वपूर्ण तथ्यों को दबा रही है। अखिलेश ने कहा कि अगर माफिया हैं तो सभी पर एक समान कार्रवाई हो, चाहे ‘कोडीन भैया’ हो या कोई और।
यह मामला अब पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है। SIT रिपोर्ट से अखिलेश सरकार के समय जारी लाइसेंसों की भूमिका पर सवाल उठने से सपा बैकफुट पर है, जबकि योगी सरकार इसे माफिया और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण बता रही है। जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।










