कोलकाता… सियासत की धड़कन। और इसी धड़कन में छिपी हैं 35 ऐसी विधानसभा सीटें, जहां 2021 में जीत-हार का फासला 5,000 वोट से भी कम रहा। अब 2026 की आहट के साथ ये सीटें फिर चर्चा में हैं—क्योंकि यहीं से तय हो सकता है कि बंगाल में सत्ता की चाबी किसके हाथ जाएगी।
2021 का चुनावी गणित
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कुल सीटें: 294
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All India Trinamool Congress (TMC): 215 सीटें
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Bharatiya Janata Party (BJP): 77 सीटें
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5,000 से कम अंतर वाली सीटें: 35
इन 35 सीटों में से 22 पर BJP और 12 पर TMC ने जीत दर्ज की। यानी जहां मुकाबला कांटे का था, वहां पलड़ा कई जगह भाजपा की ओर झुका—और यही बात अब TMC के लिए सबसे बड़ी चिंता मानी जा रही है।
2021 में Mamata Banerjee का नारा—“खेला होबे”—सिर्फ जुमला नहीं, बल्कि रणनीति था। हर बूथ, हर वार्ड में कैडर की ताकत ने TMC को 215 सीटों तक पहुंचाया। दूसरी ओर Narendra Modi और केंद्रीय नेतृत्व की आक्रामक रैलियों ने BJP को बंगाल में अब तक की सबसे बड़ी सफलता दिलाई। लेकिन असली कहानी इन 35 सीटों में छिपी है—जहां 2-3% वोट स्विंग भी सत्ता का समीकरण बदल सकता है।
TMC को आशंका है कि मतदाता सूची में मामूली बदलाव भी परिणाम को प्रभावित कर सकता है। BJP का दावा है कि वे बूथ-स्तर पर संगठन और डेटा मैनेजमेंट से बढ़त बनाएंगे।
कोलकाता और आसपास की सीटों पर महंगाई, रोजगार और शहरी सुविधाएं बड़ा मुद्दा हैं। TMC अपनी सामाजिक योजनाओं पर भरोसा जता रही है, जबकि BJP बदलाव का संदेश दे रही है। अगर तीसरी ताकतें मैदान में मजबूती से उतरती हैं, तो ‘कट वोट’ का खेल इन क्लोज सीटों पर निर्णायक हो सकता है।
इस चुनाव में TMC महिला वोट बैंक और लाभार्थी वर्ग पर फोकस, लोकल कैडर की मजबूती के साथ मैदान में हैं। वहीं BJP क्लोज सीटों की माइक्रो-मैपिंग, नए वोटरों तक पहुंच और शहरी असंतोष को भुनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक एक्सपर्टों का मानना है कि अगर इन 35 सीटों में से आधी पर भी समीकरण बदले, तो 2026 का परिणाम 2021 से बिल्कुल अलग हो सकता है।
कोलकाता की ये 35 सीटें सिर्फ आंकड़ा नहीं—ये बंगाल की सत्ता का बैरोमीटर हैं। यहां हर वोट की कीमत है, हर बूथ पर मुकाबला है, और हर रैली में संदेश साफ— “खेला अभी बाकी है…”





















