प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को असम के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे, जहां चीन सीमा के करीब भारतीय वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन देखने को मिला। पीएम ने डिब्रूगढ़ जिले के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन पर उतरने के बाद मोरान बाईपास स्थित इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का दौरा किया। यह दौरा खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि राज्य में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है और पिछले तीन महीनों में यह प्रधानमंत्री का तीसरा असम दौरा है।
प्रधानमंत्री सबसे पहले चबुआ एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे। इसके बाद भारतीय वायुसेना के C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से मोरान स्थित ईएलएफ के लिए रवाना हुए। मोरान बाईपास पर बनी यह इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर यहां लड़ाकू विमान और भारी परिवहन विमान उतर सकते हैं। यह सुविधा उत्तर-पूर्व में सैन्य तैयारियों को मजबूती देती है।
मोरान ईएलएफ पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने हैरतअंगेज हवाई प्रदर्शन किया। चीन सीमा के नजदीक फाइटर जेट की गड़गड़ाहट ने साफ संदेश दिया कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। एयर शो के दौरान तेज रफ्तार फ्लाईपास्ट, लो-लेवल मैन्युवर और सटीक लैंडिंग का प्रदर्शन किया गया। पीएम मोदी ने एयरफोर्स अधिकारियों के साथ यह प्रदर्शन देखा और पायलटों का उत्साहवर्धन किया।
असम में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पीएम का यह दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। रक्षा तैयारियों के बीच विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर-पूर्व में रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है। मोरान की इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
चीन सीमा के करीब फाइटर जेट का प्रदर्शन केवल सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि सामरिक आत्मविश्वास का प्रतीक भी माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तर-पूर्व भारत की सुरक्षा और विकास—दोनों ही केंद्र सरकार के एजेंडे में शीर्ष पर हैं।





















