रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान के बीच छिड़ी जमीनी जंग अब डिजिटल दुनिया में ‘साइबर वॉर’ का रूप ले चुकी है। इस वैश्विक तनाव के बीच भारत के महत्वपूर्ण डेटा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमलों की बाढ़ आ गई है। IIT कानपुर के C3i हब की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि भारत पर होने वाले साइबर हमलों में 50% का इजाफा हुआ है।
IIT कानपुर के ‘हनीपॉट’ (Honeypot) सिस्टम से मिले आंकड़ों के मुताबिक, भारत पर हर मिनट दो से ज्यादा हमले हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हमले चीन और रूस के आईपी (IP) एड्रेस से दर्ज किए गए हैं। चीन से हर 3 मिनट में एक हमला (कुल 17,095 हमले)। रूस से हर 4 मिनट में एक हमला (कुल 14,634 हमले)। वहीं अन्य देश जैसे जापान (13,015), सेशेल्स (9,734) और रोमानिया (3,756) भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
आनंद हांडा, चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर, C3i हब के मुताबिक युद्ध के दौर में साइबर अटैक करीब डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। पहले जहां महीने भर में 45 से 50 हजार हमले होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 70 हजार के करीब पहुंच गया है।
हैकर्स का मकसद सिर्फ डेटा चोरी नहीं, बल्कि भारत की व्यवस्था को ठप करना है। रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स इन क्षेत्रों में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं:
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वित्तीय व्यवस्था: बैंकिंग और ट्रांजैक्शन सिस्टम।
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पॉवर स्टेशन: बिजली ग्रिड को ठप करने की साजिश।
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रिफाइनरी सिस्टम: तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित करना।
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तकनीकी उपकरण: डिफेंस और सरकारी कम्युकेशन।
IIT कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. संदीप शुक्ला की देखरेख में तैयार किया गया ‘हनीपॉट’ एक तरह का डिजिटल जाल है। यह क्लाउड पर आधारित एक ऐसा नेटवर्क सिस्टम है जो हैकर्स को एक ‘अत्यधिक महत्वपूर्ण’ इंफ्रास्ट्रक्चर जैसा दिखता है। जैसे ही कोई हैकर इसमें घुसने की कोशिश करता है, सिस्टम उसे ट्रैप कर लेता है और उसके आईपी एड्रेस व हमले की तकनीक का विश्लेषण शुरू हो जाता है।
हैकर्स अब खुद को छिपाने के लिए नई चालें चल रहे हैं। आनंद हांडा ने बताया कि अब खूबसूरत पर्यटन द्वीप सेशेल्स के आईपी एड्रेस का इस्तेमाल बढ़ा है। दरअसल, हैकर्स अपनी पहचान छिपाने के लिए दूसरे देशों के सर्वर का सहारा लेते हैं, ताकि उन तक पहुंचना मुश्किल हो सके।
IIT कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल के मुताबिक, संस्थान का C3i हब लगातार इन खतरों पर नजर रखे हुए है। यहां वैज्ञानिक और स्टार्टअप्स मिलकर ऐसी स्वदेशी तकनीक और टूल्स विकसित कर रहे हैं, जो भविष्य में किसी भी बड़े साइबर हमले को नाकाम कर सकें।
डिजिटल युग में अब सीमाएं सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि इंटरनेट के केबलों में भी सुरक्षित रखनी होंगी। IIT कानपुर की यह रिपोर्ट देश के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है।














