देश की बहुप्रतीक्षित 16 वीं जनगणना का शंखनाद हो चुका है। दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में पहले चरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोरोना महामारी के कारण जो जनगणना 2021 में होनी थी, वह अब 2026 में पूरी तरह ‘डिजिटल अवतार’ में हमारे सामने है। यह न केवल दुनिया की सबसे बड़ी गिनती है, बल्कि देश के इतिहास में पहली बार नागरिकों को ‘सेल्फ-इन्यूमिरेशन’ का विकल्प भी दिया जा रहा है।
सरकार ने इस विशाल कार्य को दो मुख्य हिस्सों में बांटा है। इसमें ‘हाउसलिस्टिंग’ यानी घरों की सूची बनाई जाएगी और आवास संबंधी जानकारी ली जाएगी। इस चरण में मुख्य ‘जनसंख्या गणना’ की जाएगी, जिसमें देश के हर व्यक्ति का डेटा शामिल होगा। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के बर्फ प्रभावित इलाकों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में पूरी की जाएगी।
अब कागज-पेन का जमाना गया! 30 लाख फील्ड कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करेंगे। इसके लिए एंड्रॉयड और iOS दोनों पर ऐप उपलब्ध होंगे।
नागरिक अपने राज्य में गणना शुरू होने से 15 दिन पहले 16 अलग-अलग भाषाओं में ऑनलाइन अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद आपको एक 16 अंकों की आईडी मिलेगी, जो कर्मचारी के आने पर उसे दिखानी होगी। आजादी के बाद पहली बार इस जनगणना में जातिगत डेटा भी जुटाया जाएगा। यह फैसला पिछले साल पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने लिया था।
केंद्र सरकार ने पहले चरण के लिए 33 सवाल तय किए हैं। आपसे मुख्य रूप से ये जानकारियां मांगी जाएंगी। घर की स्थिति को लेकर मुखिया का नाम, जेंडर, जाति (SC/ST/अन्य), कमरे कितने हैं और घर अपना है या किराए का।
पीने का पानी, बिजली का स्रोत, शौचालय, रसोई, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन और खाना पकाने के ईंधन की जानकारी। रेडियो, टीवी, लैपटॉप, इंटरनेट, साइकिल, स्कूटर, कार और मोबाइल नंबर। परिवार में मुख्य रूप से कौन सा अनाज (गेहूं, चावल आदि) खाया जाता है।
इस महा-अभियान को पूरा करने के लिए 30 लाख एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। डेटा की शुद्धता जांचने के लिए ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS) पोर्टल बनाया गया है। इन कर्मचारियों को उनकी मेहनत के लिए विशेष मानदेय (Honorarium) भी दिया जाएगा।
पिछली बार (2011) जब जनगणना हुई थी, तब भारत की आबादी 121 करोड़ थी। उस वक्त पुरुषों की हिस्सेदारी 51.54% और महिलाओं की 48.46% थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की जनगणना भारत की बदलती तस्वीर और नई जरूरतों को समझने में मील का पत्थर साबित होगी।














