पुणे में CBI ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) के दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर (AGE) और एक जूनियर इंजीनियर (JE) शामिल हैं। दोनों पर एक ठेकेदार से कुल छह लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई 3 फरवरी को दर्ज की गई एक शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता ठेकेदार ने बताया था कि उसने एमईएस का निर्धारित कार्य समय पर पूरा कर दिया था और भुगतान से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज भी जमा कर दिए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने बिल पास करने के बदले रिश्वत की मांग की और भुगतान रोककर उस पर दबाव बनाया जा रहा था।
शिकायत में यह भी कहा गया कि दोनों अधिकारियों ने आपसी सहमति से कुल छह लाख रुपये की रिश्वत तय की थी। बाद में पहली किस्त के तौर पर दो लाख रुपये लेने पर सहमति बनी। इसी सूचना के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया।
5 फरवरी 2026 को सीबीआई की टीम ने पुणे के खड़की स्थित एमईएस कार्यालय में कार्रवाई करते हुए जूनियर इंजीनियर को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की पूरी रकम उसके कार्यालय से बरामद की गई। जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले की साजिश में असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर की भी अहम भूमिका थी, जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों के घरों और कार्यालयों पर तलाशी ली। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और लगभग 1,88,500 रुपये नकद बरामद किए गए, जिनका संतोषजनक हिसाब आरोपियों द्वारा नहीं दिया जा सका।
सीबीआई ने बताया कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह की गतिविधियों में और कोई अधिकारी या कर्मचारी शामिल तो नहीं है।
इस कार्रवाई के बाद एमईएस और रक्षा प्रतिष्ठानों में भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सीबीआई ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
































