भारत के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2019 की एक घटना आज भी बहस का विषय बनी हुई है। मामला था पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय जांच एजेंसी CBI के बीच सीधे टकराव का। यह टकराव न केवल संघीय ढांचे, बल्कि जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी बड़े सवाल छोड़ गया। क्या इस बार भी ममता ने ईडी के साथ वहीं किया जो उनको सही लगा।
टीएमसी ईडी की कार्रवाई को रणनीति की चोरी का मुद्दा बना रही है। मगर विपक्षी दल के सवाल मुश्किल खड़े कर सकते हैं। बीजेपी ने करप्शन वाला नैरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया है। बीजेपी सांसद डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि ममता बनर्जी ने बंगाल को ऐसी जगह बना दिया है, जो भारत के कानूनों से बाहर है। आने वाले दिनों में बंगाल के लोग ममता बनर्जी के अराजक शासन का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगे और उनके खिलाफ मजबूती से खड़े होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी 2020 के कोयले की अवैध तस्करी से जुड़े सीबीआई केस में हुई थी। कोयला घोटाले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और हवाला लेन-देन शामिल था।
क्या था पूरा मामला
फरवरी 2019 में CBI की टीम कोलकाता पुलिस कमिश्नर रहे राजीव कुमार से पूछताछ के लिए उनके आवास पर पहुंची। यह पूछताछ शारदा चिटफंड घोटाले से जुड़ी थी। CBI की इस कार्रवाई को ममता बनर्जी ने संघीय ढांचे पर हमला बताया। राज्य सरकार ने CBI अधिकारियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
2019 में सीबीआई से भीड़ गई थी ममता
दिलचस्प बात यह है कि प्रतीक जैन का अपार्टमेंट लाउडाउन स्ट्रीट से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर है, वही इलाका जहां 2019 में सीबीआई और राज्य सरकार के बीच बड़ा टकराव हुआ था। उस समय सीबीआई, शारदा चिट एंड फंड घोटाले में पूछताछ के लिए राजीव कुमार के घर पहुंची थी। लेकिन कोलकाता पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी की टीम को अंदर जाने से रोक दिया था। आरोप लगा था कि राजीव कुमार ने शारा और रोज वैली मामलों से जुड़े अहम सबूत नष्ट किए। उस टकराव के दौरान सीबीआई अधिकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि राज्य पुलिस की टीमें कोलकाता में सीबीआई दफ्तरों तक पहुंच गई थीं। हालात तब और गंभीर हो गए, जब ममता बनर्जी खुद राजीव कुमार के घर पहुंचीं और वहीं धरने पर बैठ गईं। उन्होंने पूरी रात वहीं बिताई और एक पुलिस चौकी को अस्थायी राज्य सचिवालय में तब्दील कर दिया गया, जहां मंत्रियों के साथ कैबिनेट बैठक भी हुई।
2026 विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने रणनीति बदली
2021 विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी ने भी रणनीति बदली है। पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के नेताओं ने सीधे तौर से ममता बनर्जी पर हमले किए थे। टीएमसी ने चुनाव में इसे व्यक्तिगत हमला बताते हुए मां मानुस और माटी से जोड़ दिया। इस चुनाव में भाजपा ममता बनर्जी के बजाय उनकी सरकार, महिला सुरक्षा, करप्शन को मुद्दा बनाएगी। I-PAC के ऑफिस पर ईडी के छापे में ममता बनर्जी की भूमिका को भी करप्शन से जोड़ा जा रहा है।














