पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए जैसे ही दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) की वोटिंग का ऐलान हुआ, वैसे ही चुनाव आयोग ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्य के शीर्ष प्रशासन में “सर्जिकल स्ट्राइक” कर दी है। मुख्य सचिव और गृह सचिव के बाद अब राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर सहित चार बड़े IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है।
चुनाव आयोग के इस कदम के गहरे मायने हैं। आयोग का मानना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी का ‘न्यूट्रल’ होना अनिवार्य है। जिन अधिकारियों को हटाया गया है, उन्हें अब चुनाव संपन्न होने तक किसी भी चुनावी ड्यूटी से दूर रखा जाएगा।
1993 बैच के IAS अधिकारी दुष्यंत नारियाला को नंदिनी चक्रवर्ती की जगह मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (उत्तर बंगाल विकास विभाग) के रूप में उनका अनुभव राज्य की जटिल भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों को संभालने में मददगार होगा।
जगदीश प्रसाद मीणा की जगह 1997 बैच की IAS अधिकारी संघमित्रा घोष अब राज्य की कानून-व्यवस्था की कमान संभालेंगी। दक्षिण 24 परगना जैसे संवेदनशील जिले में DM रहने के कारण उन्हें चुनावी चुनौतियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की गहरी समझ है।
राज्य पुलिस की कमान अब 1992 बैच के IPS अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता के पास है। गुप्ता को इंटेलिजेंस और पुलिस प्रशासन का लंबा अनुभव है। चुनाव के दौरान होने वाली राजनीतिक हिंसा को रोकना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
कोलकाता की सुरक्षा और व्यवस्था अब 1996 बैच के IPS अजय कुमार नंद के जिम्मे है। उन्हें नक्सल प्रभावित इलाकों और जटिल सुरक्षा घेरों को संभालने का माहिर खिलाड़ी माना जाता है।
आयोग ने साफ कर दिया है कि बंगाल चुनाव को हिंसा मुक्त बनाना उसका पहला लक्ष्य है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने पहले ही संकेत दिए थे कि किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब इन नए अधिकारियों के लिए चुनौती यह होगी कि वे राज्य की ‘चुनावी गर्मी’ के बीच शांति और व्यवस्था कैसे बनाए रखते हैं।
















