पश्चिम बंगाल की राजनीतिक तपिश के बीच चुनाव आयोग ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने चुनावी पंडितों और राजनीतिक दिग्गजों, दोनों को हैरान कर दिया है। जहां 2021 में बंगाल ने 8 चरणों की लंबी और रक्तरंजित चुनावी प्रक्रिया देखी थी, वहीं 2026 में केवल 2 चरणों (24 और 29 अप्रैल) में मतदान संपन्न होगा।
यह सिर्फ तारीखों का ऐलान नहीं, बल्कि बंगाल में शांति बहाली की दिशा में चुनाव आयोग का एक बड़ा ‘शक्ति प्रदर्शन’ माना जा रहा है।पिछली बार बंगाल चुनाव हिंसा की भेंट चढ़ गया था। मतदान के दौरान और नतीजों के बाद करीब 50 लोगों की जान गई थी। ऐसे में चुनाव आयोग का 8 चरणों से सीधे 2 चरणों पर आना आयोग के उस आत्मविश्वास को दर्शाता है, जो पिछले 6 महीनों की कड़ी मेहनत से उपजा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, यह फैसला “जनता की सुविधा” को ध्यान में रखकर लिया गया है।
चुनाव आयोग ने इस बार “तारीख आने के बाद” नहीं, बल्कि “तारीख आने से पहले” ही अपनी बिसात बिछा दी थी। इसके पीछे की रणनीति को इन तीन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. ‘प्री-पोलिंग’ शांति का ट्रेलर: पिछले चुनावों में नामांकन से पहले ही हिंसा शुरू हो जाती थी। लेकिन इस बार आयोग की सतर्कता का नतीजा है कि अब तक बंगाल से हिंसा की खबरें ‘ना के बराबर’ आई हैं। यही वह ‘ग्रीन सिग्नल’ था जिसने दो चरणों के साहसी फैसले का आधार तैयार किया।
2. 6 महीने की ‘Surgical’ तैयारी: आयोग पिछले अक्टूबर से ही बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए एक्टिव है।
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वोटर लिस्ट की सफाई: अराजक तत्वों और अवैध घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
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प्रशासन पर पकड़: पिछली बार प्रशासन पर राज्य का प्रभाव था, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने महीनों पहले ही पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी की नब्ज अपने हाथ में ले ली है।
3. सुरक्षा बलों का ‘मोबिलिटी’ प्लान: आठ चरणों में सुरक्षा बल टुकड़ों में बंट जाते थे। दो चरणों में चुनाव कराने का मतलब है कि आयोग पूरी ताकत के साथ भारी सुरक्षा बल तैनात कर सकेगा, जिससे उपद्रवियों को सिर उठाने का मौका नहीं मिलेगा।
चुनाव आयोग ने बंगाल को दो हिस्सों में बांटकर अपनी रणनीति को अंजाम दिया है:
| चरण | तारीख | प्रमुख क्षेत्र | मुख्य जिले |
| पहला चरण | 24 अप्रैल | उत्तर बंगाल और जंगलमहल (16 जिले) | दार्जिलिंग, कूचबिहार, मालदा, पुरुलिया, झाड़ग्राम, आदि। |
| दूसरा चरण | 29 अप्रैल | दक्षिण बंगाल और शहरी बेल्ट (7 जिले) | कोलकाता, उत्तर/दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, आदि। |
चुनाव आयोग का यह ‘साहस’ बंगाल की छवि बदलने की कोशिश है। अगर दो चरणों में चुनाव शांतिपूर्ण निपटते हैं, तो यह ज्ञानेश कुमार की टीम की बड़ी जीत होगी। लेकिन चुनौती कम नहीं है, क्योंकि बंगाल के चुनावी समर में शांति बनाए रखना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
















