बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की श्रृंखला में एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नरसिंगदी जिले में 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल चंद्र भौमिक (Chanchal Chandra Bhowmik) को सोते हुए जिंदा जला दिया गया। यह घटना 2026 की शुरुआत में हुई, जब चंचल अपनी ऑटोमोबाइल गैरेज/दुकान में रात में सो रहे थे।परिवार के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने गैरेज का शटर बंद कर दिया और पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। चंचल सोते समय ही जिंदा जल गए और बच नहीं पाए। पोस्टमॉर्टम और प्रारंभिक जांच से मौत की वजह जलने से हुई पुष्टि हुई है। पुलिस ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है। घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत जब्त किए गए हैं, लेकिन अभी तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिवार का आरोप है कि यह पूर्वनियोजित हमला था, जिसमें धार्मिक कट्टरता की भूमिका हो सकती है।
चंचल मूल रूप से कुमिल्ला जिले के लक्ष्मीपुर गांव के निवासी थे और परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मृत्यु से परिवार सदमे में है। यह घटना पिछले कुछ हफ्तों में हिंदुओं पर हुए कई हमलों की कड़ी है, जिसमें दीपू दास, खोकन चंद्र दास जैसे अन्य मामलों में भी अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।भारत में इस घटना पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नाराजगी जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी ताकतों के बढ़ते प्रभाव से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग तेज हो गई है।यह घटना न केवल मानवता के लिए शर्मनाक है, बल्कि यह दर्शाती है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति कितनी नाजुक हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना होगा ताकि आगे ऐसी क्रूरता रोकी जा सके।





























