बिहार में अवैध खनन और राजस्व को चूना लगाने वालों के खिलाफ नीतीश सरकार ने अपनी कमान कस ली है। राज्य में बालू घाटों का ठेका लेकर उसे बीच रास्ते में छोड़ने वाले ठेकेदारों और माफियाओं पर ‘सुशासन’ का हंटर चला है। उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कर दिया है कि सरकार को धोखे में रखने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
विजय कुमार सिन्हा ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल कई घाटों की बोली 3 से 4 गुना अधिक लगाकर ठेका ले लिया गया, लेकिन बाद में मुनाफा न होने का बहाना बनाकर घाट सरेंडर कर दिए गए। ऐसी करीब 78 कंपनियां, उनके निदेशकों और मालिकों को चिह्नित किया गया है। इन कंपनियों को भविष्य में किसी भी नई टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने से प्रतिबंधित (Ban) किया जा रहा है।
विजय सिन्हा ने बताया कि इन लोगों को लगा था कि ऊँची बोली लगाकर घाट ले लेंगे और फिर अवैध खनन के जरिए मोटा मुनाफा कमाएंगे। लेकिन विभाग की सख्ती ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। सरेंडर किए गए घाटों की डीएम की अध्यक्षता वाली जिला टास्क फोर्स समीक्षा करेगी और रेट रिवाइज कर दोबारा टेंडर निकाले जाएंगे।
विभाग ने एक सराहनीय पहल करते हुए 71 बिहारी योद्धाओं को पुरस्कृत किया। ये वो सजग नागरिक हैं जिन्होंने अवैध खनन और ओवरलोडिंग की सटीक जानकारी विभाग को दी। सुरक्षा कारणों से इनके नाम और पते गुप्त रखे गए हैं ताकि माफिया इन्हें निशाना न बना सकें।
सीमावर्ती जिलों में हो रही अवैध ढुलाई को रोकने के लिए सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं। दूसरे राज्यों से खनिज लेकर आने वाले वाहनों को ट्रांजिट चालान लेना होगा। इन वाहनों को 85 रुपये प्रति घन फीट की दर से टीपी चार्ज देना होगा।
सीमावर्ती जिलों के प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए डिजिटल मॉनीटरिंग की जाएगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बिना वैध ट्रांजिट पास के एक भी वाहन राज्य की सीमा में प्रवेश न करे।
















