अरावली पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है, जो दिल्ली से गुजरात तक करीब 700 किलोमीटर फैली हुई है। यह उत्तर भारत की ‘नेचुरल शील्ड’ या ‘ग्रीन वॉल’ कहलाती है, जो थार रेगिस्तान की रेत, धूल और गर्म हवाओं को दिल्ली-NCR, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंचने से रोकती है। लेकिन हाल के वर्षों में खनन और निर्माण के कारण अरावली का बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट की नवंबर 2025 की नई परिभाषा (केवल 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को अरावली मानना) से 90% से ज्यादा क्षेत्र संरक्षण से बाहर हो सकता है, जिससे खनन का खतरा बढ़ गया है। अगर अरावली पूरी तरह खत्म हो गई, तो दिल्ली का क्या हाल होगा? आइए समझते हैं।
प्रदूषण का कहर बढ़ेगा: अरावली दिल्ली-NCR के ‘फेफड़े’ की तरह काम करती है। इसके जंगल और पहाड़ियां धूल भरी आंधियों को रोकती हैं और PM2.5, PM10 जैसे प्रदूषकों को फिल्टर करती हैं। पहले से ही दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। विशेषज्ञों के अनुसार, अरावली के बिना थार की रेत सीधे दिल्ली तक पहुंचेगी, धूल भरी आंधियां बढ़ेंगी और AQI स्तर और खराब हो जाएगा। सांस की बीमारियां, अस्थमा और हृदय रोगों में भयानक वृद्धि होगी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अखिलेश यादव ने चेतावनी दी है कि अरावली के बावजूद प्रदूषण इतना गंभीर है, तो बिना इसके स्थिति ‘वीभत्स’ हो जाएगी।
पानी की भयंकर कमी: अरावली भूजल रिचार्ज का प्रमुख स्रोत है। इसके चट्टानी ढांचे बारिश के पानी को सोखकर एक्विफर को भरते हैं, जो दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के लाखों लोगों को पानी उपलब्ध कराते हैं। एक हेक्टेयर अरावली क्षेत्र सालाना 20 लाख लीटर से ज्यादा पानी रिचार्ज कर सकता है। खनन से यह प्रक्रिया बाधित होती है, भूजल स्तर गिरता है और नदियां सूखती हैं। बिना अरावली के दिल्ली में पानी का संकट और गहरा जाएगा – ट्यूबवेल सूखेंगे, यमुना जैसी नदियां कमजोर पड़ेंगी और सूखा आम हो जाएगा।
तापमान और जलवायु में उलटफेर: अरावली तापमान को संतुलित रखती है और मानसून की हवाओं को प्रभावित करती है। इसके बिना गर्मियां और क्रूर हो जाएंगी, हीटवेव बढ़ेंगी और तापमान में तेज वृद्धि होगी। धूल और रेत से मिट्टी की नमी खत्म हो जाएगी, खेती प्रभावित होगी और रेगिस्तानीकरण तेज होगा। थार का रेगिस्तान दिल्ली के दरवाजे तक पहुंच जाएगा।
जैव विविधता का नुकसान: अरावली तेंदुआ, हाइना, सैकड़ों पक्षी प्रजातियों और दुर्लभ पौधों का घर है। इसके विनाश से वन्यजीवों का आवास खत्म हो जाएगा, मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, बिना अरावली के दिल्ली एक धूल भरे, गर्म, पानी रहित और जहरीली हवा वाले शहर में बदल जाएगी। ‘सेव अरावली’ अभियान इसी खतरे से आगाह कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली को बचाना दिल्ली और उत्तर भारत के अस्तित्व का सवाल है। सरकार और समाज को मिलकर इसके संरक्षण के लिए कदम उठाने होंगे, वरना आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में अरावली के बारे में पढ़ेंगी।








