बिहार में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। एनडीए ने अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग साफ कर दिए हैं। भाजपा से नितिन नवीन, शिवेश राम, जेडीयू से रामनाथ ठाकुर और आरएलएम से उपेंद्र कुशवाहा रेस में हैं। लेकिन सवाल यह है कि विधानसभा के आंकड़ों के हिसाब से कौन कितना सुरक्षित है? आइए आसान भाषा में समझते हैं सीटों का पूरा गुणा-गणित।
बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव के नियम के अनुसार, एक उम्मीदवार को जीतने के लिए करीब 41 विधायकों के वोट की जरूरत होती है।
वर्तमान में एनडीए गठबंधन (बीजेपी, जेडीयू, हम और लोजपा-आर) के पास कुल 202 विधायक हैं। अगर एनडीए अपने 4 उम्मीदवारों को मैदान में उतारता है, तो उसे कुल 164 वोटों की जरूरत होगी। 202 में से 164 घटाने के बाद भी एनडीए के पास 38 वोट फालतू बचेंगे।
भाजपा के पास अकेले 89 विधायक हैं। ऐसे में नितिन नवीन और शिवेश राम की जीत में कोई तकनीकी अड़चन नहीं दिखती। उनके पास कोटे से ज्यादा वोट हैं।
असली पेंच पांचवीं सीट और उपेंद्र कुशवाहा को लेकर फंस सकता है। एनडीए के पास 4 सीटें जिताने के बाद 38 वोट बच रहे हैं। जीत के लिए चाहिए 41 वोट। यानी एनडीए को पांचवीं सीट के लिए मात्र 3 और वोटों की जरूरत होगी। अगर एनडीए के सभी दल एकजुट रहते हैं और विपक्ष कोई मजबूत घेराबंदी नहीं करता, तो उपेंद्र कुशवाहा की राह भी आसान हो जाएगी।
राज्यसभा चुनाव में सबसे बड़ा डर ‘क्रॉस वोटिंग’ का होता है। अगर गठबंधन के अंदर वोटों का बंटवारा सही ढंग से नहीं हुआ या एक-दो विधायक इधर-उधर हुए, तो निर्दलीय या विपक्षी उम्मीदवार खेल बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, 202 के भारी-भरकम आंकड़े के साथ एनडीए फिलहाल बहुत मजबूत स्थिति में है।

















