पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को नदिया जिले के मायापुर स्थित इस्कॉन मुख्यालय का दौरा किया। आधिकारिक तौर पर इसे धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम बताया गया, लेकिन चुनावी साल में इस यात्रा ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। यह एक महीने में शाह का दूसरा बंगाल दौरा है, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल श्रद्धा का कार्यक्रम था या इसके पीछे 2026 विधानसभा चुनाव की रणनीति भी छिपी है?
शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि वे शाह के साथ कृष्णानगर तक गए और मायापुर के कार्यक्रमों में शामिल हुए। उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल में “भ्रष्ट और राष्ट्रविरोधी” तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाकर राष्ट्रवादी सरकार बनाने के प्रयास में ऐसे नेतृत्व का होना प्रेरणादायक है। इस बयान ने साफ संकेत दिया कि भले ही मंच धार्मिक था, लेकिन संदेश राजनीतिक भी था।
मायापुर में आयोजित समारोह में अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि वे गृह मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि चैतन्य महाप्रभु के भक्त के रूप में यहां पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी लंबे समय से मायापुर आने की इच्छा थी। भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भक्ति सिद्धांत का सबसे बड़ा योगदान भक्तिवेदांत प्रभुपाद जैसे शिष्य तैयार करना था। आज विश्वभर में फैला इस्कॉन आंदोलन उन्हीं महान संतों के प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने इस्कॉन की सामाजिक भूमिका की भी सराहना की और कहा कि संगठन आपदाओं के दौरान राहत कार्य, भोजन वितरण, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के माध्यम से मानवता की सेवा कर रहा है। साथ ही युवाओं को भारतीय त्योहारों और भगवद गीता के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। हालांकि इस यात्रा में कोई औपचारिक राजनीतिक सभा या भाषण नहीं हुआ, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह का लगातार दूसरा बंगाल दौरा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों के साथ संवाद बढ़ाकर अपने जनाधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। मायापुर जैसे वैश्विक धार्मिक केंद्र में शाह की उपस्थिति को हिंदू वोट बैंक के सशक्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस खेमे में इसे ‘राजनीतिक यात्रा’ करार देने की चर्चा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा धार्मिक मंचों का उपयोग राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए कर रही है। मायापुर की यह यात्रा आध्यात्मिक रंग में रंगी जरूर दिखी, लेकिन उसके सियासी मायने गहरे हैं। चुनावी साल में अमित शाह की सक्रियता और विपक्ष के तीखे बयान संकेत दे रहे हैं कि बंगाल में राजनीतिक पारा अभी और चढ़ेगा।

























