मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच जंग का दायरा अब और व्यापक होता दिख रहा है। ईरान और इज़राइल के बीच जारी सीधे टकराव में अब ईरान के मददगार खुलकर मैदान में उतर आए हैं। यमन के ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने लाल सागर (Red Sea) के महत्वपूर्ण नौवहन मार्ग पर फिर से हमले शुरू करने का एलान कर दिया है।
अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) से बातचीत में दो हूथी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को एक बार फिर निशाना बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान पर बढ़ते दबाव को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग को बाधित कर वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
युद्ध विशेषज्ञों ने ईरान की सैन्य क्षमता का विश्लेषण करते हुए कुछ अहम तथ्य साझा किए हैं:
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कमजोर एयर डिफेंस: जानकारों का मानना है कि ईरान का पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम शायद उतना अभेद्य न हो।
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मिसाइल अड्डों का जाल: ईरान की असली ताकत उसके बिखरे हुए मिसाइल बेस हैं। इन्हें इस तरह फैलाया गया है कि एक साथ सबको नष्ट करना नामुमकिन है।
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सेकंड रिस्पॉन्स कैपेबिलिटी: ईरान की तैयारी ‘दूसरे हमले’ (Second Strike) पर टिकी है। यानी अगर उस पर हमला होता है, तो उसके पास पलटवार करने की जबरदस्त क्षमता है।
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प्री-प्लान्ड लॉन्च साइट्स: अलग-अलग भौगोलिक इलाकों में तैयार की गई लॉन्च साइट्स संकेत देती हैं कि ईरान ने जवाबी कार्रवाई का ब्लूप्रिंट पहले से ही तैयार कर रखा था।
विशेषज्ञों की मानें तो “ईरान की ताकत उसकी पारंपरिक सेना से ज्यादा उसके प्रॉक्सी संगठनों (यमन, लेबनान) और भूमिगत मिसाइल साइलो (Silos) में छिपी है, जो किसी भी हमले के बाद भीषण पलटवार करने में सक्षम हैं।”

















