उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसे लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि, सरकारी स्तर पर तैयारियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चुनाव आयोग ने मतपत्रों (बैलट पेपर) की छपाई शुरू कर दी है और कई जिलों में ये पहुँचने भी लगे हैं। खास बात यह है कि इस बार भ्रम दूर करने के लिए चार अलग-अलग रंगों के पर्चों का इस्तेमाल किया जाएगा।
वोट डालते समय और गिनती के वक्त किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसलिए प्रशासन ने रंगों का बंटवारा कुछ इस तरह किया है:
सफेद रंग: ग्राम प्रधान के चुनाव के लिए।
गुलाबी रंग: ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड मेंबर) के लिए।
नीला रंग: बीडीसी (क्षेत्र पंचायत सदस्य) के लिए।
पीला रंग: जिला पंचायत सदस्य के लिए।
इन अलग-अलग रंगों की वजह से वोटरों को यह पहचानने में आसानी होगी कि वे किस पद के लिए वोट डाल रहे हैं।
तैयारियां भले ही तेज हों, लेकिन चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) के गठन में हो रही देरी है। जब तक आयोग का गठन नहीं होता, तब तक सीटों का आरक्षण तय नहीं हो पाएगा। सरकार ने कोर्ट में वादा तो किया था, लेकिन अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
प्रदेश की करीब 58 हजार पंचायतों में मौजूदा जन-प्रतिनिधियों का समय पूरा होने वाला है:
ग्राम प्रधान: 26 मई 2026 तक।
जिला पंचायत: 11 जुलाई 2026 तक।
क्षेत्र पंचायत: 19 जुलाई 2026 तक।
भले ही प्रशासन मतपत्र भेजकर अपनी मुस्तैदी दिखा रहा है, लेकिन हकीकत यही है कि जब तक आरक्षण की तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक प्रदेश के गांवों में चुनावी बिगुल बजना मुश्किल लग रहा है।
















