अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में साउथ अफ्रिका की वो हार अब बीती बात है, लेकिन उसका दर्द टीम इंडिया के ‘सेमीफाइनल समीकरण’ में साफ नजर आ रहा है। दक्षिण अफ्रीका से मिली शिकस्त और वेस्टइंडीज की जिम्बाब्वे पर बड़ी जीत ने पॉइंट्स टेबल के गणित को उलझा दिया है। अब टीम इंडिया के लिए मैदान पर उतरने का मतलब सिर्फ दो अंक हासिल करना नहीं, बल्कि नेट रन रेट (NRR) की जंग जीतना भी है।
दो बड़े समीकरण जो भारत का भविष्य तय करेंगे:
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अगर दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज को हरा दे: यह भारत के लिए सबसे मुफीद स्थिति होगी। बस अपने दोनों मैच जीतें और NRR को विंडीज से बेहतर रखें।
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अगर वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका को हरा दे: यहाँ मामला फंस जाएगा। तब भारत को दुआ करनी होगी कि जिम्बाब्वे भी दक्षिण अफ्रीका को हरा दे, ताकि पॉइंट्स टेबल में बराबरी का मौका मिले।
किस्मत ने भारत को एक छोटा सा मौका दिया है। दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के मैच दोपहर में हैं, जबकि भारत के मैच शाम को। इसका मतलब है। मैदान पर उतरने से पहले कप्तान सूर्य कुमार यादव को पता होगा कि टारगेट क्या है। कितने ओवर में मैच खत्म करना है या विपक्षी को कितने रनों पर रोकना है, इसकी ब्लूप्रिंट पहले से तैयार होगी। रणनीति अब ‘अंधेरे में तीर’ चलाने जैसी नहीं, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसी होगी।
जब दीवार पीठ से लग जाए, तो प्रयोग लाजमी हैं। फैंस के मन में कुछ बड़े सवाल हैं:
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अक्षर पटेल: क्या अपनी फिरकी और निचले क्रम की बल्लेबाजी से संतुलन वापस लाएंगे?
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संजू सैमसन: क्या मिडिल ऑर्डर में उस ‘X-फाक्टर’ की कमी पूरी करने के लिए उन्हें मौका मिलेगा?
भारत को अब सिर्फ संतुलित नहीं, बल्कि आक्रामक क्रिकेट की जरूरत है। पावरप्ले में ताबड़तोड़ रन और डेथ ओवर्स में घातक गेंदबाजी ही सेमीफाइनल का रास्ता साफ करेगी। इतिहास गवाह है कि भारतीय टीम ने अक्सर दबाव में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेली है। अब नजरें सिर्फ जीत पर नहीं, जीत के ‘मार्जिन’ पर हैं। क्या टीम इंडिया इस अग्निपरीक्षा को पार कर पाएगी? करोड़ों फैंस की धड़कनें अब नेट रन रेट के कैलकुलेटर पर टिकी हैं।


















