नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित ‘बड़ी साजिश’ से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत दे दी। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसी) यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत मामला बनता है। कोर्ट ने उन्हें “साजिश में केंद्रीय और निर्णायक भूमिका” निभाने वाला बताया, जो अन्य आरोपियों से “गुणात्मक रूप से अलग” है।
यह दंगे फरवरी 2020 में सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए थे, जिसमें 53 लोग मारे गए (ज्यादातर मुस्लिम) और सैकड़ों घायल हुए। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि यह हिंसा सोची-समझी साजिश थी, जिसका उद्देश्य देश की छवि खराब करना था। उमर खालिद (पूर्व जेएनयू छात्र) और शरजील इमाम पर भड़काऊ भाषण देने और साजिश रचने का इल्जाम है। दोनों पांच साल से ज्यादा समय से जेल में हैं, बिना ट्रायल शुरू हुए।

कोर्ट ने जमानत इनकार के आधार बताते हुए कहा कि मुकदमे में देरी जमानत का “ट्रंप कार्ड” नहीं बन सकती। हालांकि, दोनों को एक साल बाद या सभी गवाहों की गवाही पूरी होने पर दोबारा जमानत मांगने की छूट दी गई। वहीं, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत मिली, क्योंकि उनकी भूमिका “सीमित और सहायक” मानी गई।

फैसले के बाद उमर खालिद की भावुक प्रतिक्रिया सामने आई। उनकी साथी बानो ज्योत्सना लाहिरी ने बताया कि उमर ने कहा, “अब यही जिंदगी है (जेल ही मेरी जिंदगी है)।” लेकिन वे अन्य आरोपियों की रिहाई से बहुत खुश और राहत महसूस कर रहे हैं। उमर के पिता एस.क्यू.आर. इलियास ने फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। विपक्षी दलों ने इसे न्यायिक असमानता करार दिया, जबकि भाजपा ने स्वागत किया।











