प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शाम ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन-1 व 2’ का भव्य लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश आज एक नए इतिहास का साक्षी बन रहा है। उन्होंने दोहराया कि भारत विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ नए युग में कदम रख चुका है। सेवा तीर्थ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थापित किए गए हैं।
कर्तव्य भवन-1 और 2 में रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि समेत कई अहम मंत्रालयों को स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन अत्याधुनिक भवनों के माध्यम से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और तेजी लाना है। इसे विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईये आपको बताते हैं पुराने पीएमओ की कुछ खास बाते जो अब नए भवन में सिर्फ स्मृति के रूप में रहेगी।
दशकों तक भारत की सत्ता का केंद्र रहा साउथ ब्लॉक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की राजनीतिक यात्रा का मूक गवाह रहा है। यहीं से ऐसे फैसले लिए गए, जिन्होंने युद्धों की दिशा तय की, आर्थिक नीतियों को आकार दिया और वैश्विक मंच पर देश की पहचान मजबूत की। अब 13 फरवरी से प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट हो रहा है, जिसके साथ एक ऐतिहासिक अध्याय का समापन और प्रशासनिक ढांचे के नए दौर की शुरुआत होगी।
15 अगस्त 1947 से 12 फरवरी 2025 तक पीएमओ महान वास्तुकार हरबर्ट बेकर द्वारा डिज़ाइन किए गए साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा। 1911 में राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद ब्रिटिश शासन ने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का निर्माण कराया था। आज़ादी के बाद साउथ ब्लॉक भारतीय शासन व्यवस्था का प्रमुख केंद्र बना।
जवाहरलाल नेहरू ने सबसे पहले इसी भवन से देश की बागडोर संभाली। उनके कार्यकाल में विदेश नीति और रक्षा रणनीति की नींव पड़ी तथा गुटनिरपेक्ष आंदोलन की अवधारणा विकसित हुई। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान वे देर रात तक यहीं रणनीतिक चर्चाएं करते थे।
लाल बहादुर शास्त्री ने भी इसी कार्यालय से नेतृत्व किया। हरित क्रांति की बुनियाद रखने और 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय महत्वपूर्ण निर्णय यहीं से लिए गए। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1971 का युद्ध और बांग्लादेश का गठन हुआ। उस दौर में साउथ ब्लॉक देश की सामरिक गतिविधियों का केंद्र बन गया था।
राजीव गांधी ने तकनीकी आधुनिकीकरण की पहल यहीं से शुरू की। 1990 के दशक में पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण की ऐतिहासिक शुरुआत की, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ा।
अटल बिहारी वाजपेयी ने पोखरण परमाणु परीक्षण का निर्णय और कारगिल युद्ध के दौरान नेतृत्व साउथ ब्लॉक से किया। डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता हुआ। 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अहम सैन्य फैसलों की रणनीति भी यहीं से तैयार की।
अब प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो रहा है, जो सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है। सेवा तीर्थ-1 में पीएमओ, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थापित होंगे। आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, खुला कार्यस्थल और बेहतर समन्वय सुविधाओं से युक्त यह परिसर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तैयार किया गया है।
सरकार साउथ ब्लॉक को ‘भारत थ्रू द एजेस’ संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। ‘सेवा तीर्थ’ नाम सत्ता से अधिक सेवा की भावना को दर्शाता है। माना जा रहा है कि यह बदलाव औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़कर नए भारत की प्रशासनिक सोच का प्रतीक बनेगा।
नेहरू से लेकर मोदी तक, साउथ ब्लॉक ने देश की बदलती तस्वीर को देखा है। यहां लिए गए निर्णयों ने भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका को दिशा दी। अब सेवा तीर्थ से प्रशासनिक इतिहास का नया अध्याय लिखा जाएगा, लेकिन स्वतंत्र भारत के शुरुआती आठ दशकों की कहानी में साउथ ब्लॉक का उल्लेख सदैव रहेगा।





















